किं शीतलैः क्लमविनोदिभिरार्द्रवातान्
सञ्चारयामि नलिनीदलतालवृन्तैः ।
अङ्के निधाय करभोरु यथासुखं ते
संवाहयामि चरणावुत पद्मतांरौ ॥
किं शीतलैः क्लमविनोदिभिरार्द्रवातान्
सञ्चारयामि नलिनीदलतालवृन्तैः ।
अङ्के निधाय करभोरु यथासुखं ते
संवाहयामि चरणावुत पद्मतांरौ ॥
सञ्चारयामि नलिनीदलतालवृन्तैः ।
अङ्के निधाय करभोरु यथासुखं ते
संवाहयामि चरणावुत पद्मतांरौ ॥
अन्वयः
AI
करभोरु! किम् शीतलैः क्लमविनोदिभिः नलिनीदलतालवृन्तैः आर्द्रवातान् सञ्चारयामि? उत ते पद्मताम्रौ चरणौ अङ्के निधाय यथासुखम् संवाहयामि?
Summary
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O you with beautiful thighs, shall I create cool, fatigue-removing, moist breezes with fans of lotus leaves? Or shall I place your lotus-red feet on my lap and comfortably massage them as you please?
पदच्छेदः
AI
| किम् | किम् | shall I |
| शीतलैः | शीतल (३.३) | with cool |
| क्लमविनोदिभिः | क्लम–विनोदिन् (३.३) | which remove fatigue |
| आर्द्रवातान् | आर्द्र–वात (२.३) | moist breezes |
| सञ्चारयामि | सञ्चारयामि (सम्√चर् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | shall I cause to move |
| नलिनीदलतालवृन्तैः | नलिनी–दल–तालवृन्त (३.३) | with fans made of lotus leaves |
| अङ्के | अङ्क (७.१) | on my lap |
| निधाय | निधाय (नि√धा+ल्यप्) | having placed |
| करभोरु | करभ–ऊरु (८.१) | O you with thighs like the trunk of a young elephant |
| यथासुखम् | यथासुखम् | comfortably |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| संवाहयामि | संवाहयामि (सम्√वह् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | shall I massage |
| चरणौ | चरण (२.२) | feet |
| उत | उत | or |
| पद्मताम्रौ | पद्म–ताम्र (२.२) | red like lotuses |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | शी | त | लैः | क्ल | म | वि | नो | दि | भि | रा | र्द्र | वा | ता |
| न्स | ञ्चा | र | या | मि | न | लि | नी | द | ल | ता | ल | वृ | न्तैः |
| अ | ङ्के | नि | धा | य | क | र | भो | रु | य | था | सु | खं | ते |
| सं | वा | ह | या | मि | च | र | णा | वु | त | प | द्म | तां | रौ |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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