अन्वयः
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तनुगात्रि! मदनः त्वाम् अनिशम् तपति, माम् पुनः दहति एव। हि दिवसः यथा शशाङ्कम् ग्लपयति, तथा कुमुद्वतीम् न (ग्लपयति)।
Summary
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O slender-limbed one, the god of love constantly torments you, but he utterly burns me. Indeed, the day causes the moon to fade, but not so the night-lotus.
पदच्छेदः
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| तपति | तपति (√तप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | torments |
| तनुगात्रि | तनु–गात्री (८.१) | O slender-limbed one |
| मदनः | मदन (१.१) | the god of love |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| अनिशम् | अनिशम् | constantly |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| पुनः | पुनर् | but |
| दहति | दहति (√दह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | burns |
| एव | एव | completely |
| ग्लपयति | ग्लपयति (√ग्लै +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | causes to fade |
| यथा | यथा | as |
| शशाङ्कम् | शशाङ्क (२.१) | the moon |
| न | न | not |
| तथा | तथा | so |
| हि | हि | for |
| कुमुद्वतीम् | कुमुद्वती (२.१) | the night-lotus |
| दिवसः | दिवस (१.१) | the day |
छन्दः
आर्या []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | प | ति | त | नु | गा | त्रि | म | द | न | |
| स्त्वा | म | नि | शं | मां | पु | न | र्द | ह | त्ये | व |
| ग्ल | प | य | ति | य | था | श | शा | ङ्कं | ||
| न | त | था | हि | कु | मु | द्व | तीं | दि | व | सः |
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