चलापाङ्गां दृष्टिं स्पृशसि बहुशो वेपथुमतीम्
रहस्याख्यायीव स्वनसि मृदु कर्णान्तिकचरः ।
करौ व्याधुन्वत्याः पिबसि रतिसर्वस्वमधरम्
वयं तत्त्वान्वेषान्मधुकर हतास्त्वं खलु कृती ॥
चलापाङ्गां दृष्टिं स्पृशसि बहुशो वेपथुमतीम्
रहस्याख्यायीव स्वनसि मृदु कर्णान्तिकचरः ।
करौ व्याधुन्वत्याः पिबसि रतिसर्वस्वमधरम्
वयं तत्त्वान्वेषान्मधुकर हतास्त्वं खलु कृती ॥
रहस्याख्यायीव स्वनसि मृदु कर्णान्तिकचरः ।
करौ व्याधुन्वत्याः पिबसि रतिसर्वस्वमधरम्
वयं तत्त्वान्वेषान्मधुकर हतास्त्वं खलु कृती ॥
अन्वयः
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हे मधुकर, त्वं चलापाङ्गां वेपथुमतीं दृष्टिं बहुशः स्पृशसि। कर्णान्तिकचरः सन् रहसि आख्यायी इव मृदु स्वनसि। करौ व्याधुन्वत्याः रतिसर्वस्वम् अधरं पिबसि। वयं तत्त्वान्वेषात् हताः, त्वं खलु कृती असि।
Summary
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O bee, you repeatedly touch her trembling eyes, buzz softly near her ear like a secret-teller, and drink her lip—the treasure of love—as she waves her hands. We are ruined by our search for the truth about her, while you are truly fortunate.
पदच्छेदः
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| चलापाङ्गाम् | चल–अपाङ्ग (२.१) | with moving corners |
| दृष्टिम् | दृष्टि (२.१) | her gaze |
| स्पृशसि | स्पृशसि (√स्पृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you touch |
| बहुशः | बहुशस् | repeatedly |
| वेपथुमतीम् | वेपथुमत् (२.१) | trembling |
| रहसि | रहस् (७.१) | in secret |
| आख्यायी | आख्यायिन् (१.१) | a whisperer |
| इव | इव | like |
| स्वनसि | स्वनसि (√स्वन् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you buzz |
| मृदु | मृदु | softly |
| कर्णान्तिकचरः | कर्ण–अन्तिक–चर (१.१) | hovering near her ear |
| करौ | कर (२.२) | her hands |
| व्याधुन्वत्याः | व्याधुन्वत् (वि+आ√धू+शतृ, ६.१) | of her who is waving |
| पिबसि | पिबसि (√पा कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you drink |
| रतिसर्वस्वम् | रति–सर्वस्व (२.१) | the treasure of love |
| अधरम् | अधर (२.१) | her lip |
| वयम् | अस्मद् (१.३) | We |
| तत्त्वान्वेषात् | तत्त्व–अन्वेष (५.१) | from searching for the truth |
| मधुकर | मधुकर (८.१) | O bee |
| हताः | हत (√हन्+क्त, १.३) | are ruined |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| खलु | खलु | indeed |
| कृती | कृतिन् (१.१) | are fortunate |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | ला | पा | ङ्गां | दृ | ष्टिं | स्पृ | श | सि | ब | हु | शो | वे | प | थु | म | ती |
| म्र | ह | स्या | ख्या | यी | व | स्व | न | सि | मृ | दु | क | र्णा | न्ति | क | च | रः |
| क | रौ | व्या | धु | न्व | त्याः | पि | ब | सि | र | ति | स | र्व | स्व | म | ध | र |
| म्व | यं | त | त्त्वा | न्वे | षा | न्म | धु | क | र | ह | ता | स्त्वं | ख | लु | कृ | ती |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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