असंशयं क्षत्रपरिग्रहक्षमा
यदार्यमस्यामभिलाषि मे मनः ।
सतां हि संदेहपदेषु वस्तुषु
प्रमाणमन्तःकरण प्रवृत्तयः ॥
असंशयं क्षत्रपरिग्रहक्षमा
यदार्यमस्यामभिलाषि मे मनः ।
सतां हि संदेहपदेषु वस्तुषु
प्रमाणमन्तःकरण प्रवृत्तयः ॥
यदार्यमस्यामभिलाषि मे मनः ।
सतां हि संदेहपदेषु वस्तुषु
प्रमाणमन्तःकरण प्रवृत्तयः ॥
अन्वयः
AI
इयम् असंशयं क्षत्रपरिग्रहक्षमा अस्ति, यत् मे आर्यं मनः अस्याम् अभिलाषि अस्ति। हि, सतां संदेहपदेषु वस्तुषु अन्तःकरणप्रवृत्तयः प्रमाणं भवन्ति।
Summary
AI
Undoubtedly, she is fit to be married by a Kshatriya, because my noble mind desires her. For in matters of doubt, the inclinations of the heart are the authority for good people.
पदच्छेदः
AI
| असंशयम् | असंशय | Undoubtedly |
| क्षत्रपरिग्रहक्षमा | क्षत्र–परिग्रह–क्षमा (१.१) | fit to be married by a Kshatriya |
| यत् | यद् | since |
| आर्यम् | आर्य (१.१) | noble |
| अस्याम् | इदम् (७.१) | for her |
| अभिलाषि | अभिलाषिन् (१.१) | is desirous |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| मनः | मनस् (१.१) | mind |
| सताम् | सत् (६.३) | For the good |
| हि | हि | for |
| संदेहपदेषु | संदेह–पद (७.३) | in matters of doubt |
| वस्तुषु | वस्तु (७.३) | in things |
| प्रमाणम् | प्रमाण (१.१) | the authority |
| अन्तःकरणप्रवृत्तयः | अन्तःकरण–प्रवृत्ति (१.३) | the inclinations of the heart |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सं | श | यं | क्ष | त्र | प | रि | ग्र | ह | क्ष | मा |
| य | दा | र्य | म | स्या | म | भि | ला | षि | मे | म | नः |
| स | तां | हि | सं | दे | ह | प | दे | षु | व | स्तु | षु |
| प्र | मा | ण | म | न्तः | क | र | ण | प्र | वृ | त्त | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.