गात्राणि कालीयकचर्चितानि
सपत्त्रलेखानि मुखाम्बुजानि ।
शिरांसि कालागुरुधूपितानि
कुर्वन्ति नार्यः सुरतोत्सवाय ॥

अन्वयः AI नार्यः सुरतोत्सवाय गात्राणि कालीयकचर्चितानि, मुखाम्बुजानि सपत्त्रलेखानि, शिरांसि च कालागुरुधूपितानि कुर्वन्ति।
Summary AI For the festival of love, women anoint their limbs with saffron paste, paint decorative patterns on their lotus-like faces, and perfume their hair with the smoke of dark aloe-wood.
सारांश AI रति-उत्सव के लिए स्त्रियाँ अपने शरीर पर कालीयक का लेप लगाती हैं, मुख पर पत्रलेखा बनाती हैं और अपने केशों को काले अगरु की धूप से सुवासित करती हैं।
पदच्छेदः AI
गात्राणिगात्र (२.३) their limbs
कालीयकचर्चितानिकालीयकचर्चित (√चर्च्+क्त, २.३) anointed with saffron paste
सपत्त्रलेखानिपत्त्रलेखा (२.३) with decorative patterns
मुखाम्बुजानिमुखअम्बुज (२.३) their lotus-like faces
शिरांसिशिरस् (२.३) their heads (hair)
कालागुरुधूपितानिकालअगुरुधूपित (√धूप्+णिच्+क्त, २.३) perfumed with dark aloe-wood
कुर्वन्तिकुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) they make
नार्यःनारी (१.३) women
सुरतोत्सवायसुरतउत्सव (४.१) for the festival of love
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
गा त्रा णि का ली र्चि ता नि
त्त्र ले खा नि मु खा म्बु जा नि
शि रां सि का ला गु रु धू पि ता नि
कु र्व न्ति ना र्यः सु तो त्स वा
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