काञ्चीगुणैः काञ्चनरत्नचित्रै-
र्नो भूषयन्ति प्रमदा नितम्बान् ।
न नूपुरैर्हंसरुतं भजद्भिः
पादाम्बुजान्यम्बुजकान्तिभाञ्जि ॥
काञ्चीगुणैः काञ्चनरत्नचित्रै-
र्नो भूषयन्ति प्रमदा नितम्बान् ।
न नूपुरैर्हंसरुतं भजद्भिः
पादाम्बुजान्यम्बुजकान्तिभाञ्जि ॥
र्नो भूषयन्ति प्रमदा नितम्बान् ।
न नूपुरैर्हंसरुतं भजद्भिः
पादाम्बुजान्यम्बुजकान्तिभाञ्जि ॥
अन्वयः
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प्रमदाः काञ्चनरत्नचित्रैः काञ्चीगुणैः नितम्बान् न उ भूषयन्ति। हंसरुतं भजद्भिः नूपुरैः अम्बुजकान्तिभाञ्जि पादाम्बुजानि च न (भूषयन्ति)।
Summary
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Women no longer adorn their hips with girdles studded with gold and gems, nor their lotus-like feet, which possess the beauty of lotuses, with anklets that imitate the cooing of swans.
सारांश
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युवतियाँ अब अपने नितम्बों को स्वर्ण और रत्नों से जड़ित करधनी से सुसज्जित नहीं कर रही हैं और न ही हंसों के समान शब्द करने वाले नूपुरों से अपने कमल जैसे चरणों को सजा रही हैं।
पदच्छेदः
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| काञ्चीगुणैः | काञ्ची–गुण (३.३) | with girdles |
| काञ्चनरत्नचित्रैः | काञ्चन–रत्न–चित्र (३.३) | studded with gold and gems |
| न | न | not |
| उ | उ | indeed |
| भूषयन्ति | भूषयन्ति (√भूष् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | adorn |
| प्रमदाः | प्रमदा (१.३) | women |
| नितम्बान् | नितम्ब (२.३) | their hips |
| न | न | not |
| नूपुरैः | नूपुर (३.३) | with anklets |
| हंसरुतम् | हंस–रुत (२.१) | the cooing of swans |
| भजद्भिः | भजत् (√भज्+शतृ, ३.३) | imitating |
| पादाम्बुजानि | पाद–अम्बुज (२.३) | their lotus-like feet |
| अम्बुजकान्तिभाञ्जि | अम्बुज–कान्ति–भाज् (२.३) | possessing the beauty of lotuses |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | ञ्ची | गु | णैः | का | ञ्च | न | र | त्न | चि | त्रै |
| र्नो | भू | ष | य | न्ति | प्र | म | दा | नि | त | म्बान् |
| न | नू | पु | रै | र्हं | स | रु | तं | भ | ज | द्भिः |
| पा | दा | म्बु | जा | न्य | म्बु | ज | का | न्ति | भा | ञ्जि |
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