अन्या प्रियेण परिभुक्तमवेक्ष्य गात्रं
हर्षान्विता विरचिताधरचारुशोभा ।
कूर्पासकं परिदधाति नखक्षताङ्गी
व्यालम्बिनीलललितालककुञ्चिताक्षी ॥

अन्वयः AI अन्या नखक्षताङ्गी व्यालम्बिनीलललितालककुञ्चिताक्षी (तरुणी) प्रियेण परिभुक्तम् गात्रम् अवेक्ष्य हर्षान्विता (सती) विरचिताधरचारुशोभा (सती) कूर्पासकम् परिदधाति।
Summary AI Another woman, her limbs marked by her lover's nails and her eyes framed by charming dark curls, looks at her body enjoyed by her beloved. Filled with joy, she enhances the beauty of her lips and puts on a bodice.
सारांश AI कोई अन्य स्त्री अपने प्रिय द्वारा उपभोग किए गए अंगों को देखकर हर्षित है और अपने अधरों को सजाकर, नख-क्षतों को ढकने के लिए चोली पहन रही है।
पदच्छेदः AI
अन्याअन्य (१.१) another woman
प्रियेणप्रिय (३.१) by her beloved
परिभुक्तम्परिभुक्त (परि√भुज्+क्त, २.१) enjoyed
अवेक्ष्यअवेक्ष्य (अव√ईक्ष्+ल्यप्) having seen
गात्रम्गात्र (२.१) body
हर्षान्विताहर्षअन्वित (१.१) filled with joy
विरचिताधरचारुशोभाविरचितअधरचारुशोभा (१.१) who has adorned the beautiful splendor of her lips
कूर्पासकम्कूर्पासक (२.१) a bodice
परिदधातिपरिदधाति (परि√धा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) she puts on
नखक्षताङ्गीनखक्षतअङ्ग (१.१) whose limbs have nail marks
व्यालम्बिनीलललितालककुञ्चिताक्षीव्यालम्बिन्नीलललितअलककुञ्चितअक्षि (१.१) whose eyes are framed by charming, hanging, dark, curved curls
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
न्या प्रि ये रि भु क्त वे क्ष्य गा त्रं
र्षा न्वि ता वि चि ता चा रु शो भा
कू र्पा कं रि धा ति क्ष ता ङ्गी
व्या म्बि नी लि ता कु ञ्चि ता क्षी
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