दन्तच्छदैः सव्रणदन्तचिह्नैः
स्तनैश्च पाण्यग्रकृताभिलेखैः ।
संसूच्यते निर्दयमङ्गनानां
रतोपभोगो नवयौवनानाम् ॥
दन्तच्छदैः सव्रणदन्तचिह्नैः
स्तनैश्च पाण्यग्रकृताभिलेखैः ।
संसूच्यते निर्दयमङ्गनानां
रतोपभोगो नवयौवनानाम् ॥
स्तनैश्च पाण्यग्रकृताभिलेखैः ।
संसूच्यते निर्दयमङ्गनानां
रतोपभोगो नवयौवनानाम् ॥
अन्वयः
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सव्रणदन्तचिह्नैः दन्तच्छदैः च पाण्यग्रकृताभिलेखैः स्तनैः, नवयौवनानाम् अङ्गनानां निर्दयं रतोपभोगः संसूच्यते।
Summary
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The merciless lovemaking of young women is indicated by their lips bearing the marks of teeth-inflicted wounds, and by their breasts marked with nail-scratches.
सारांश
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नवयुवती स्त्रियों के होंठों पर दांतों के घाव और स्तनों पर नखों के निशान उनके निर्दयतापूर्वक किए गए रति-उपभोग को स्पष्ट रूप से सूचित कर रहे हैं।
पदच्छेदः
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| दन्तच्छदैः | दन्तच्छद (३.३) | by the lips |
| सव्रणदन्तचिह्नैः | स–व्रण–दन्त–चिह्न (३.३) | with marks of teeth-inflicted wounds |
| स्तनैः | स्तन (३.३) | by the breasts |
| च | च | and |
| पाण्यग्रकृताभिलेखैः | पाणि–अग्र–कृत (√कृ+क्त)–अभिलेख (३.३) | with scratches made by fingernails |
| संसूच्यते | संसूच्यते (सम्√सूच् +यक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is indicated |
| निर्दयम् | निर्दयम् | merciless |
| अङ्गनानाम् | अङ्गना (६.३) | of women |
| रतोपभोगः | रति–उपभोग (१.१) | lovemaking |
| नवयौवनानाम् | नव–यौवन (६.३) | of those in fresh youth |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | न्त | च्छ | दैः | स | व्र | ण | द | न्त | चि | ह्नैः |
| स्त | नै | श्च | पा | ण्य | ग्र | कृ | ता | भि | ले | खैः |
| सं | सू | च्य | ते | नि | र्द | य | म | ङ्ग | ना | नां |
| र | तो | प | भो | गो | न | व | यौ | व | ना | नाम् |
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