मार्गं समीक्ष्यातिनिरस्तनीरं
प्रवासखिन्नं पतिमुद्वहन्त्यः ।
अवेक्ष्यमाणा हरिणेक्षणाक्ष्यः
प्रबोधयन्तीव मनोरथानि ॥

अन्वयः AI हरिणेक्षणाक्ष्यः अतिनिरस्तनीरं मार्गं समीक्ष्य, प्रवासखिन्नं पतिम् अवेक्ष्यमाणाः, उद्वहन्त्यः (सत्यः), मनोरथानि प्रबोधयन्ति इव।
Summary AI The deer-eyed women, seeing the road completely free of water and looking at their husbands weary from travel, seem to awaken their desires as they support them.
सारांश AI सूखे मार्गों को देखती हुई और विदेश से लौटने वाले अपने थके हुए पतियों की प्रतीक्षा करती हुई मृगनयनी स्त्रियाँ अपनी चितवन से मानो कामेच्छाओं को जगा रही हैं।
पदच्छेदः AI
मार्गम्मार्ग (२.१) the road
समीक्ष्यसमीक्ष्य (सम्√ईक्ष्+ल्यप्) having seen
अतिनिरस्तनीरम्अतिनिरस्तनीर (२.१) completely free of water
प्रवासखिन्नम्प्रवासखिन्न (√खिद्+क्त, २.१) weary from travel
पतिम्पति (२.१) their husbands
उद्वहन्त्यःउद्वहन्ती (उद्√वह्+शतृ, १.३) supporting/bearing
अवेक्ष्यमाणाःअवेक्ष्यमाणा (अव√ईक्ष्+शानच्, १.३) looking at
हरिणेक्षणाक्ष्यःहरिणईक्षणअक्षि (१.३) the deer-eyed women
प्रबोधयन्तिप्रबोधयन्ति (प्र√बुध् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) awaken
इवइव as if
मनोरथानिमनोरथ (२.३) their desires
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
मा र्गं मी क्ष्या ति नि स्त नी रं
प्र वा खि न्नं ति मु द्व न्त्यः
वे क्ष्य मा णा रि णे क्ष णा क्ष्यः
प्र बो न्ती नो था नि
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