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चञ्चन्मनोज्ञशफरीरसनाकलापाः
पर्यन्तसंस्थितसिताण्डजपङ्क्तिहाराः ।
नद्यो विशालपुलिनान्तनितम्बबिम्बा
मन्दं प्रयान्ति समदाः प्रमदा इवाद्य ॥

अन्वयः AI अद्य चञ्चत्-मनोज्ञ-शफरी-रसना-कलापाः, पर्यन्त-संस्थित-सित-अण्डज-पङ्क्ति-हाराः, विशाल-पुलिन-अन्त-नितम्ब-बिम्बाः नद्यः स-मदाः प्रमदाः इव मन्दं प्रयान्ति ।
Summary AI Today, the rivers flow slowly, like impassioned young women. Their girdles are the darting, lovely Śapharī fish; their pearl necklaces are the rows of white birds resting on their banks; and their broad hips are the expansive sandbanks.
सारांश AI शरद ऋतु में नदियाँ कामुक स्त्रियों की भाँति मंद गति से बह रही हैं। चंचल मछलियाँ उनकी करधनी हैं, तटों पर बैठे श्वेत पक्षियों की पंक्तियाँ उनके मोतियों के हार हैं और उनके विशाल रेतीले तट सुंदर नितम्बों के समान प्रतीत हो रहे हैं।
पदच्छेदः AI
चञ्चन्मनोज्ञशफरीरसनाकलापाःचञ्चत् (√चञ्च्+शतृ)मनोज्ञशफरी–रसनाकलाप (१.३) whose girdles are darting, lovely Śapharī fish
पर्यन्तसंस्थितसिताण्डजपङ्क्तिहाराःपर्यन्तसंस्थित (सम्√स्था+क्त)सितअण्डजपङ्क्तिहार (१.३) whose necklaces are rows of white birds on the banks
नद्यःनदी (१.३) the rivers
विशालपुलिनान्तनितम्बबिम्बाःविशाल–पुलिनान्तनितम्बबिम्ब (१.३) whose hips are the broad sandbanks
मन्दम्मन्दम् slowly
प्रयान्तिप्रयान्ति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) flow
समदाःसमद (१.३) impassioned
प्रमदाःप्रमदा (१.३) young women
इवइव like
अद्यअद्य today
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
ञ्च न्म नो ज्ञ री ना ला पाः
र्य न्त सं स्थि सि ता ण्ड ङ्क्ति हा राः
द्यो वि शा पु लि ना न्त नि म्ब बि म्बा
न्दं प्र या न्ति दाः प्र दा वा द्य
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