नृत्यप्रयोगरहिताञ्शिखिनो विहाय
हंसानुपैति मदनो मधुरप्रगीतान् ।
मुक्त्वा कदम्बकुटजार्जुनसर्जनीपा-
न्सप्तच्छदानुपगता कुसुमोद्गमश्रीः ॥

अन्वयः AI मदनः नृत्य-प्रयोग-रहितान् शिखिनः विहाय मधुर-प्रगीतान् हंसान् उपैति। कुसुम-उद्गम-श्रीः कदम्ब-कुटज-अर्जुन-सर्ज-नीपान् मुक्त्वा सप्त-च्छदान् उपगता।
Summary AI The God of Love, abandoning the peacocks who have ceased their dancing, now approaches the swans with their sweet songs. The beauty of blossoming flowers, having left the Kadamba, Kutaja, Arjuna, Sarja, and Nīpa trees, has now gone to the Saptacchada trees.
सारांश AI कामदेव ने अब नृत्य छोड़ चुके मोरों को त्यागकर मधुर कलरव करने वाले हंसों का आश्रय ले लिया है। फूलों की शोभा भी अब कदम्ब, कुटज और अर्जुन के वृक्षों को छोड़कर सप्तपर्णी के वृक्षों पर आ गई है।
पदच्छेदः AI
नृत्यप्रयोगरहितान्नृत्यप्रयोगरहित (२.३) who have ceased their dancing performance
शिखिनःशिखिन् (२.३) the peacocks
विहायविहाय (वि√हा+ल्यप्) abandoning
हंसान्हंस (२.३) the swans
उपैतिउपैति (उप√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) approaches
मदनःमदन (१.१) the God of Love
मधुरप्रगीतान्मधुरप्रगीत (प्र√गै+क्त, २.३) with their sweet songs
मुक्त्वामुक्त्वा (√मुच्+क्त्वा) having left
कदम्बकुटजार्जुनसर्जनीपान्कदम्बकुटजअर्जुनसर्जनीप (२.३) the Kadamba, Kutaja, Arjuna, Sarja, and Nīpa trees
सप्तच्छदान्सप्तच्छद (२.३) the Saptacchada trees
उपगताउपगत (उप√गम्+क्त, १.१) has gone to
कुसुमोद्गमश्रीःकुसुमउद्गमश्री (१.१) the beauty of blossoming flowers
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
नृ त्य प्र यो हि ता ञ्शि खि नो वि हा
हं सा नु पै ति नो धु प्र गी तान्
मु क्त्वा म्ब कु जा र्जु र्ज नी पा
न्स प्त च्छ दा नु ता कु सु मो द्ग श्रीः
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