कुवलयदलनीलैरुन्नतैस्तोयनम्रै-
र्मृदुपवनविधूतैर्मन्दमन्दं चलद्भिः ।
अपहृतमिव चेतस्तोयदैः सेन्द्रचापैः
पथिकजनवधूनां तद्वियोगाकुलानाम् ॥
कुवलयदलनीलैरुन्नतैस्तोयनम्रै-
र्मृदुपवनविधूतैर्मन्दमन्दं चलद्भिः ।
अपहृतमिव चेतस्तोयदैः सेन्द्रचापैः
पथिकजनवधूनां तद्वियोगाकुलानाम् ॥
र्मृदुपवनविधूतैर्मन्दमन्दं चलद्भिः ।
अपहृतमिव चेतस्तोयदैः सेन्द्रचापैः
पथिकजनवधूनां तद्वियोगाकुलानाम् ॥
अन्वयः
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कुवलयदलनीलैः उन्नतैः तोयनम्रैः मृदुपवनविधूतैः मन्दमन्दं चलद्भिः स-इन्द्रचापैः तोयदैः तत्-वियोग-आकुलानाम् पथिकजनवधूनां चेतः अपहृतम् इव ।
Summary
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The hearts of the wives of travelers, distressed by separation, seem to be stolen by the clouds. These clouds are dark like blue lotus petals, high in the sky, bent with water, gently shaken by the soft wind, moving very slowly, and accompanied by rainbows.
सारांश
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नीलकमल के समान नीले, जल के भार से झुके हुए, मंद पवन से धीरे-धीरे हिलते हुए और इंद्रधनुष से सुशोभित बादलों ने अपने पति के वियोग में व्याकुल विरहिणी स्त्रियों के मन को जैसे हर लिया है।
ऋतुसमुच्चयटीका (अमरकीर्तिसूरिः)
कुवलयेति ॥ तोयदैर्मेघैः । पथिकजनवधूनां पथिकजनानां वध्वस्तासां चेतोऽपहृतं मुषितमिव जातम् । क्ं भूतैः तोद्यदैः — कुवलयदलवत् कुमुदपत्रवन्नीलाः श्यामाः कुवलयदलनीलास्तैः । नीलश्यामयोरैक्यम् । पुनः उन्नतैरुन्नसितैः । पुनः किंभूतैः — तोयेन जलेन नम्रास्तैः । पुनः किंभूतैः — मृदुपवनविशेषान्मन्दमन्दं चलद्भिः मृदुः स्वल्पो योऽसौ पवनो वायुस्तस्मात् मन्दं मन्दं चलद्भिः चलमानैः । पुनः किंभूतैः — सेन्द्रचापैः इन्द्रचपेनेन्द्रधनुषा सह वर्तन्त इति सेन्द्रचापास्तैः । किं भूतानां पथिकजनानां —तद्वियोगक्षतानां तेषां पथिकजनानां वियोगस्तेन क्षताः पीडितास्तासाम् ॥
चन्द्रिकाटीका (मणिरामः)
कुवलयेति ॥ कुवलयस्य नीलोत्पलस्य दलं पत्रमिव नीलैः श्यामवर्णैरुन्नतैरुच्चस्थैस्तोयनम्रैर्जलनम्रैर्मृदुना लघुना पवनेन वातेन विधूताः कम्पितास्तैरत एव मन्दमन्दमतिमन्थरं चलद्भिर्गच्छद्भिः सेन्द्रचापैरिन्द्रधनुषा सहितैस्तोयदैर्मेघैस्तेषां पान्थजनानां वियोगेन विरहेणाकुला व्याकुलास्तासां पथिकजनवधूनां विरहिणीनां चेतोऽन्तःकरणमपहृतमिव हत्वा नीतमिवित्युत्प्रेक्षा । मालिनीवृत्तमेतत् लक्षणं तूक्तम् ॥
पदच्छेदः
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| कुवलयदलनीलैः | कुवलय–दल–नील (३.३) | by those dark as blue lotus petals |
| उन्नतैः | उन्नत (उद्√नम्+क्त, ३.३) | by the high |
| तोयनम्रैः | तोय–नम्र (√नम्+र, ३.३) | by those bent with water |
| मृदुपवनविधूतैः | मृदु–पवन–विधूत (वि√धू+क्त, ३.३) | by those shaken by the gentle wind |
| मन्दमन्दं | मन्दमन्दम् | very slowly |
| चलद्भिः | चलत् (√चल्+शतृ, ३.३) | by the moving |
| अपहृतम् | अपहृत (अप√हृ+क्त, १.१) | stolen |
| इव | इव | as if |
| चेतः | चेतस् (१.१) | the heart |
| तोयदैः | तोयद (३.३) | by the clouds |
| सेन्द्रचापैः | स–इन्द्रचाप (३.३) | with rainbows |
| पथिकजनवधूनाम् | पथिक–जन–वधू (६.३) | of the wives of travelers |
| तद्वियोगाकुलानाम् | तत्–वियोग–आकुल (६.३) | of those distressed by separation from them |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | व | ल | य | द | ल | नी | लै | रु | न्न | तै | स्तो | य | न | म्रै |
| र्मृ | दु | प | व | न | वि | धू | तै | र्म | न्द | म | न्दं | च | ल | द्भिः |
| अ | प | हृ | त | मि | व | चे | त | स्तो | य | दैः | से | न्द्र | चा | पैः |
| प | थि | क | ज | न | व | धू | नां | त | द्वि | यो | गा | कु | ला | नाम् |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
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