अभीक्ष्णमुच्चैर्ध्वनता पयोमुचा
घनान्धकारीकृतशर्वरीष्वपि ।
तडित्प्रभादर्शितमार्गभूमयः
प्रयान्ति रागादभिसारिकाः स्त्रियः ॥
अभीक्ष्णमुच्चैर्ध्वनता पयोमुचा
घनान्धकारीकृतशर्वरीष्वपि ।
तडित्प्रभादर्शितमार्गभूमयः
प्रयान्ति रागादभिसारिकाः स्त्रियः ॥
घनान्धकारीकृतशर्वरीष्वपि ।
तडित्प्रभादर्शितमार्गभूमयः
प्रयान्ति रागादभिसारिकाः स्त्रियः ॥
अन्वयः
AI
अभीक्ष्णम् उच्चैः ध्वनता पयोमुचा घनान्धकारीकृतशर्वरीषु अपि, तडित्प्रभादर्शितमार्गभूमयः अभिसारिकाः स्त्रियः रागात् प्रयान्ति।
Summary
AI
Even on nights made dark by clouds thundering loudly and repeatedly, women going to meet their lovers proceed out of passion, their paths illuminated by flashes of lightning.
सारांश
AI
बादलों के निरंतर गर्जन और घने अंधकार से भरी रातों में भी, प्रेम के वशीभूत अभिसारिकाएं बिजली की चमक से दिखाई देने वाले मार्ग के सहारे अपने प्रियतमों से मिलने जा रही हैं।
ऋतुसमुच्चयटीका (अमरकीर्तिसूरिः)
अभीक्ष्णमिति ॥ अभिसारकाः स्त्रियः साङ्केतिकस्थानम् अभिसरन्ति । अभिसरन्ति रात्रौ गच्छन्तीत्यभिसारिकाः । अभिसारिकाः स्त्रियः घनान्धकारीकृतशर्वरीष्वपि । घनैर्मेघैः अन्धकाररूपाः कृताः घनान्धकारीकृता एवं विधा याः शर्वर्यः तासु रागात्प्रयान्ति गच्छन्ति । कान्तमिति शेषः । कथं भूता अभिसारिकाः स्त्रियः — तडितो विद्युतः प्रभा कान्तिस्तया दर्शिता मार्गभूमिर्यासां ताः । किं भूतासु — उच्चैरतिशयेन पयोमुचां मेघानां ध्वनितैर्गर्जितैः सुतीक्ष्णं गाढं युक्तासु इति शेषः । अभीष्टमुच्चैरिति वा पाठः तत्राभीष्टं प्रियमित्यर्थः ॥
चन्द्रिकाटीका (मणिरामः)
अभीक्ष्णमिति ॥ अभीक्ष्णं मुहुर्मुहुः ।
मुहुर्मुहुः पुनः शश्वदभीक्ष्णमसकृत्समाः इत्यमरः (अमरकोशः ३.४.१ ) । उच्चैरुच्चस्वरेण ध्वनता शब्दं कुर्वता पयोमुचा मेघेन घनान्धकारीकृतशर्वरीष्वप्यघनान्धकारा घनान्धकारा यथा संपद्यन्ते तथा कृताश्च ताः शर्वर्यो रात्रयो यथा तथाभूतासु तडित्प्रभया विद्युत्कान्त्या दर्शित मार्गभूमयो यासां तास्तथोक्ता अभिसारिकाः स्त्रियो रागात्कान्तानुरागेण सङ्केतमिति शेषः । प्रयान्ति गच्छन्तीत्यर्थः । अभिसारिकालक्षणमुक्तममरसिंहेन (अमरकोशः २.६.१० ) — कान्तार्थिनी तु या याति सङ्केतं साऽभिसारिका इति ॥
पदच्छेदः
AI
| अभीक्ष्णम् | अभीक्ष्णम् | repeatedly |
| उच्चैः | उच्चैः | loudly |
| ध्वनता | ध्वनत् (√ध्वन्+शतृ, ३.१) | by the thundering |
| पयोमुचा | पयोमुच् (३.१) | by the cloud |
| घनान्धकारीकृतशर्वरीषु | घन–अन्धकार–कृत–शर्वरी (७.३) | on nights made dark by dense clouds |
| अपि | अपि | even |
| तडित्प्रभादर्शितमार्गभूमयः | तडित्–प्रभा–दर्शित (√दृश्+णिच्+क्त)–मार्गभूमि (१.३) | for whom the path is shown by flashes of lightning |
| प्रयान्ति | प्रयान्ति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they go |
| रागात् | राग (५.१) | out of passion |
| अभिसारिकाः | अभिसारिका (१.३) | women going to a tryst |
| स्त्रियः | स्त्री (१.३) | women |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भी | क्ष्ण | मु | च्चै | र्ध्व | न | ता | प | यो | मु | चा |
| घ | ना | न्ध | का | री | कृ | त | श | र्व | री | ष्व | पि |
| त | डि | त्प्र | भा | द | र्शि | त | मा | र्ग | भू | म | यः |
| प्र | या | न्ति | रा | गा | द | भि | सा | रि | काः | स्त्रि | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.