नितान्तलाक्षारसरागरञ्जितै-
र्नितम्बिनीनां चरणैः सनूपुरैः ।
पदे पदे हंसरुतानुकारिभि-
र्जनस्य चित्तं क्रियते समन्मथम् ॥
नितान्तलाक्षारसरागरञ्जितै-
र्नितम्बिनीनां चरणैः सनूपुरैः ।
पदे पदे हंसरुतानुकारिभि-
र्जनस्य चित्तं क्रियते समन्मथम् ॥
र्नितम्बिनीनां चरणैः सनूपुरैः ।
पदे पदे हंसरुतानुकारिभि-
र्जनस्य चित्तं क्रियते समन्मथम् ॥
अन्वयः
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नितम्बिनीनाम् नितान्त-लाक्षा-रस-राग-रञ्जितैः, स-नूपुरैः, पदे पदे हंस-रुत-अनुकारिभिः चरणैः जनस्य चित्तम् स-मन्मथम् क्रियते ।
Summary
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The minds of people are filled with passion by the feet of beautiful women, which are deeply colored with the red dye of lac, adorned with anklets, and at every step, imitate the cackling of swans.
सारांश
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लाख के रस से रंगे और हंसों की ध्वनि करने वाले नूपुरों से सुसज्जित सुंदरियों के चरण हर कदम पर पुरुषों के मन में कामभाव जगाते हैं।
ऋतुसमुच्चयटीका (अमरकीर्तिसूरिः)
नितान्तेति ॥ नितम्बिनीनां चरणैः पादैः जनस्य चित्तं समन्मथं सकामं क्रियते । स्थूलः सुभगो वा नितम्बो विद्यते यासां तास्तथा तासां तरुणीनां मन्मथेन स्मरेण सह वर्तत इति समन्मथम् । किंभूतैश्चरणैः — नितान्तलाक्षारसरागरञ्जितैः । लाक्षाया रसो द्रव्यस्तस्य रागो रक्तत्वं लाक्षारसरागः । नितान्तमतिशयेन लाक्षारसरागस्तेन रञ्जिता अरुणत्वमापादितास्तथा तैः । पुनः किंभूतैश्चरणैः — सनूपुरैः नूपुरोपलक्षितैः । पुनः किंभूतैः — पदे पदे चरणयोर्न्यासे न्यासे हंसस्य रुतं शब्दमनुकुर्वन्तीति हंसरुतानुकारिणस्तैः । पदे पदे हंसस्वन इव शब्दायमानैः । अतोऽत्र स्त्रियोऽपि मनोहारिण्यो भवन्तीति भावः ॥
चन्द्रिकाटीका (मणिरामः)
नितान्तेति ॥ नितान्तमत्यन्तं लाक्षारसस्य रागेण रञ्जितास्तैस्तथोक्तैः सनूपुरैर्मञ्जीरसहितैः
मञ्जीरो नूपुरोऽस्त्रियाम् इत्यमरः (अमरकोशः २.६.११० ) । पदे पदे प्रतिपदं हंसरुतं मरालशब्दमनुकुर्वन्ति तैस्तथोक्तैर्नितम्बिनीनां चरणैर्जनस्य लोकस्य चित्तमन्तःकरणं समन्मथं मदनसहितम् । मदनो मन्मथो मारः इत्यमरः (अमरकोशः १.१.२७ ) । क्रियत इत्यर्थः ॥
पदच्छेदः
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| नितान्तलाक्षारसरागरञ्जितैः | नितान्त–लाक्षा–रस–राग–रञ्जित (√रञ्ज्+णिच्+क्त, ३.३) | deeply colored with the red dye of lac |
| नितम्बिनीनाम् | नितम्बिनी (६.३) | of beautiful women |
| चरणैः | चरण (३.३) | by the feet |
| सनूपुरैः | स–नूपुर (३.३) | with anklets |
| पदे | पद (७.१) | at every |
| पदे | पद (७.१) | step |
| हंसरुतानुकारिभिः | हंस–रुत–अनुकारिन् (अनु√कृ+णिनि, ३.३) | imitating the sound of swans |
| जनस्य | जन (६.१) | of people |
| चित्तम् | चित्त (१.१) | the mind |
| क्रियते | क्रियते (√कृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is made |
| समन्मथम् | स–मन्मथ (१.१) | filled with passion |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | ता | न्त | ला | क्षा | र | स | रा | ग | र | ञ्जि | तै |
| र्नि | त | म्बि | नी | नां | च | र | णैः | स | नू | पु | रैः |
| प | दे | प | दे | हं | स | रु | ता | नु | का | रि | भि |
| र्ज | न | स्य | चि | त्तं | क्रि | य | ते | स | म | न्म | थम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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