सुवासितं हर्म्यतलं मनोहरं
प्रियामुखोच्छ्वासविकम्पितं मधु ।
सुतन्त्रिगीतं मदनस्य दीपनं
शुचौ निशीथेऽनुभवन्ति कामिनः ॥
सुवासितं हर्म्यतलं मनोहरं
प्रियामुखोच्छ्वासविकम्पितं मधु ।
सुतन्त्रिगीतं मदनस्य दीपनं
शुचौ निशीथेऽनुभवन्ति कामिनः ॥
प्रियामुखोच्छ्वासविकम्पितं मधु ।
सुतन्त्रिगीतं मदनस्य दीपनं
शुचौ निशीथेऽनुभवन्ति कामिनः ॥
अन्वयः
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शुचौ निशीथे कामिनः सुवासितम् मनोहरम् हर्म्य-तलम्, प्रिया-मुख-उच्छ्वास-विकम्पितम् मधु, सुतन्त्रि-गीतम्, मदनस्य दीपनम् च अनुभवन्ति ।
Summary
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In the summer, at midnight, lovers enjoy fragrant and charming palace terraces, wine stirred by the breath from their beloved's mouth, and well-strung music that kindles passion.
सारांश
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ग्रीष्म की रातों में प्रेमी जन महलों की सुगंधित छतों पर, सुंदरी की श्वास से महकती मदिरा और वीणा के मधुर स्वर के साथ कामोद्दीपक आनंद का अनुभव करते हैं।
ऋतुसमुच्चयटीका (अमरकीर्तिसूरिः)
सुवासितमिति ॥ कामिनो भोगिपुरुषाः शुचावाषाढे निशीथेऽर्धरात्रावेतानि वस्तून्यनुभवन्ति सेवन्ते । एतानि कानि — सुवासितं चन्दनकर्पूरादिवासोपलक्षितं हर्म्यतलं गृहोपरिभागम् सेवन्ते । किंभूतं हर्म्यतलं — मनोहरम् । पुनः प्रियामुखोच्छ्वासविकम्पितंमधु । प्रियायाः मुखोच्छ्वासः प्रियामुखोच्छ्वासः प्रियामुखोच्छ्वासस्तेन विकम्पितं विशेषेण कम्पयमानं मधु मद्यं सेवन्ते । पुनः सुतन्त्रि सुष्टु शोभना तन्त्री वीणा यत्र तत् सुतन्त्रि । ईदृशं गीतं गानं सेवन्ते । किंभूतं गीतम् — मदनस्य कामस्य दीपनं कामोद्दीप्तिकरमित्यर्थः ॥
चन्द्रिकाटीका (मणिरामः)
सुवासितमिति ॥ कामिनो विलासिनः शुचौ ग्रीष्मकाले निशीथे अर्धरात्रे ।
अर्धरात्रनिशीथौ द्वौ इत्यमरः (अमरकोशः १.४.७ ) । सुवासितं सुगन्धजलसेकादिना सुगन्धीकृतं मनोहरं सुन्दरं हर्म्यतलं प्रासादतलम् । प्रियामुखस्य कान्तावदनस्योच्छ्वासेन विकम्पितं मधु । मदनस्य कन्दर्पस्य दीपनमुद्दीपकं सुतन्त्रिणा गीतं गानं च । गीतं गानमिमे समे इत्यमरः (अमरकोशः १.६.२८ ) । अनुभवन्ति आस्वादयन्तीत्यर्थः । एतेनापि ग्रीष्मकालस्य कामिनां मनोहरत्वमुक्तम् ॥
पदच्छेदः
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| सुवासितम् | सुवासित (सु√वास्+णिच्+क्त, २.१) | Well-fragranced |
| हर्म्यतलम् | हर्म्य–तल (२.१) | palace terrace |
| मनोहरम् | मनोहर (√हृ+अच्, २.१) | charming |
| प्रियामुखोच्छ्वासविकम्पितम् | प्रिया–मुख–उच्छ्वास–विकम्पित (वि√कम्प्+णिच्+क्त, २.१) | stirred by the breath from the beloved's mouth |
| मधु | मधु (२.१) | wine |
| सुतन्त्रिगीतम् | सुतन्त्रि–गीत (२.१) | music from well-strung instruments |
| मदनस्य | मदन (६.१) | of passion |
| दीपनम् | दीपन (√दीप्+णिच्+ल्युट्, २.१) | the kindler |
| शुचौ | शुचि (७.१) | in summer |
| निशीथे | निशीथ (७.१) | at midnight |
| अनुभवन्ति | अनुभवन्ति (अनु√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | experience |
| कामिनः | कामिन् (१.३) | lovers |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | वा | सि | तं | ह | र्म्य | त | लं | म | नो | ह | रं |
| प्रि | या | मु | खो | च्छ्वा | स | वि | क | म्पि | तं | म | धु |
| सु | त | न्त्रि | गी | तं | म | द | न | स्य | दी | प | नं |
| शु | चौ | नि | शी | थे | ऽनु | भ | व | न्ति | का | मि | नः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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