निशाः शशाङ्कक्षतनीलराजयः
क्वचिद्विचित्रं जलयन्त्रमन्दिरम् ।
मणिप्रकाराः सरसं च चन्दनं
शुचौ प्रिये यान्ति जनस्य सेव्यताम् ॥
निशाः शशाङ्कक्षतनीलराजयः
क्वचिद्विचित्रं जलयन्त्रमन्दिरम् ।
मणिप्रकाराः सरसं च चन्दनं
शुचौ प्रिये यान्ति जनस्य सेव्यताम् ॥
क्वचिद्विचित्रं जलयन्त्रमन्दिरम् ।
मणिप्रकाराः सरसं च चन्दनं
शुचौ प्रिये यान्ति जनस्य सेव्यताम् ॥
अन्वयः
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प्रिये, शुचौ शशाङ्क-क्षत-नील-राजयः निशाः, क्वचित् विचित्रम् जलयन्त्र-मन्दिरम्, मणि-प्रकाराः, सरसम् चन्दनम् च जनस्य सेव्यताम् यान्ति ।
Summary
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O beloved, in summer, nights whose darkness is dispelled by the moon, mansions with wonderful water fountains, various gems, and moist sandalwood paste become enjoyable for people.
सारांश
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इस ऋतु में चांदनी रातें, जल-यंत्रों से युक्त शीतल भवन, विविध रत्न और सुगंधित चंदन लोगों के लिए अत्यंत सुखद और सेवन योग्य हो जाते हैं।
ऋतुसमुच्चयटीका (अमरकीर्तिसूरिः)
निशेति ॥ हे प्रिये शुचावाषाढे जनस्य लोकस्यैतानि वस्तूनि सेवनार्हः सेव्यस्तस्यभावः सेव्यता तां सेव्यतां सेव्यभावं यान्ति प्राप्नुवन्ति । एतानि वस्तूनि जनः सेवत इत्यर्थः । एतानि कानि — निशाः रात्रयः । किम्भूताः निशाः — शशाङ्केन चन्द्रेण क्षताः खण्डिताः नीलराजयोऽन्धकारश्रेणयो यासां ताः । पुनः — सरसं रसोपलक्षितं अर्थात् घृष्टं चन्दनं जनस्य सेव्यतां याति । ग्रीष्मर्तावेतानि वस्तूनि सुखदानि भवन्तीत्यर्थः ॥
चन्द्रिकाटीका (मणिरामः)
निशा इति ॥ हे प्रिये क्वचिच्छशाङ्केन चन्द्रमसा कर्त्रा क्षत्ता दूरीकृता नीलराजयस्तमः पङ्क्तयो यासां तास्तथोक्ता निशा रात्रयः ।
निशा निशीथिनी रात्रिः इत्यमरः (अमरकोशः १.४.४ ) । क्वचित् विचित्रं जलयन्त्रेण युक्तं मन्दिरं गृहं । क्वचिन्मणिप्रकारा मणिविशेषेणाश्चन्द्रकान्तादयः । क्वचित् सरसं सान्द्रं चन्दनञ्च शुचौ ग्रीष्मकाले जनस्य लोकस्य सेव्यतामुपभोगविषयतां यान्तीति वचनविपरिणामेनान्वयः
पदच्छेदः
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| निशाः | निशा (१.३) | Nights |
| शशाङ्कक्षतनीलराजयः | शशाङ्क–क्षत–नील–राजि (१.३) | whose darkness is dispelled by the moon |
| क्वचित् | क्वचित् | somewhere |
| विचित्रम् | विचित्र (१.१) | wonderful |
| जलयन्त्रमन्दिरम् | जलयन्त्र–मन्दिर (१.१) | a mansion with water fountains |
| मणिप्रकाराः | मणि–प्रकार (१.३) | various kinds of gems |
| सरसम् | सरस (२.१) | moist |
| च | च | and |
| चन्दनम् | चन्दन (२.१) | sandalwood paste |
| शुचौ | शुचि (७.१) | in summer |
| प्रिये | प्रिया (८.१) | O beloved |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | become |
| जनस्य | जन (६.१) | of people |
| सेव्यताम् | सेव्यता (२.१) | enjoyable |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | शाः | श | शा | ङ्क | क्ष | त | नी | ल | रा | ज | यः |
| क्व | चि | द्वि | चि | त्रं | ज | ल | य | न्त्र | म | न्दि | रम् |
| म | णि | प्र | का | राः | स | र | सं | च | च | न्द | नं |
| शु | चौ | प्रि | ये | या | न्ति | ज | न | स्य | से | व्य | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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