तं कृतप्रणतयोऽनुजीविनः
कोमलात्मनखरागरूषितम् ।
भेजिरे नवदिवाकरातप-
स्पृष्टपङ्कजतुलाधिरोहणम् ॥

अन्वयः AI कृत-प्रणतयः अनुजीविनः, कोमल-आत्म-नख-राग-रूषितम्, नव-दिवाकर-आतप-स्पृष्ट-पङ्कज-तुला-अधिरोहणम् तम् (चरणम्) भेजिरे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तमिति॥ कोमलेन मृदुलेनात्मनखानां रागेणारुप्येन रूषितं छुरितम्। अत एव नवदिवाकरातपेन स्पृष्टं व्याप्तं यत्पङ्कजं तस्य तुलां साम्यतामधिरोहति प्राप्नोतीति तुलाधिरोहणम्। तं चरणमनुजीविनः कृतप्रणतयः कृतनमस्काराः सन्तो भेजिरे सिषेविरे ॥
Summary AI His attendants, having made their obeisance, served that foot, which was adorned with the red lac-dye of his soft toenails and which rivaled a lotus touched by the rays of the morning sun.
सारांश AI प्रणाम करते हुए सेवकों ने उसके कोमल नखों की लालिमा से रंजित उस चरण की वंदना की, जो प्रातःकालीन सूर्य की किरणों से स्पर्श किए हुए कमल के समान सुंदर था।
पदच्छेदः AI
तम्तद् (२.१) that (foot)
कृतप्रणतयःकृतप्रणति (१.३) having made their obeisance
अनुजीविनःअनुजीविन् (१.३) The attendants
कोमलात्मनखरागरूषितम्कोमलआत्मनखरागरूषित (२.१) adorned with the red lac-dye of his soft toenails
भेजिरेभेजिरे (√भज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) served
नवदिवाकरातपस्पृष्टपङ्कजतुलाधिरोहणम्नवदिवाकरआतपस्पृष्टपङ्कजतुलाअधिरोहण (२.१) which rivaled a lotus touched by the rays of the morning sun
छन्दः रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
तं कृ प्र यो ऽनु जी वि नः
को ला त्म रा रू षि तम्
भे जि रे दि वा रा
स्पृ ष्ट ङ्क तु ला धि रो णम्
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.