अन्वयः
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पश्चिम-क्रतु-विदा पुरोधसा सङ्गताः मन्त्रिणः रोग-शान्तिम् अपदिश्य, तम् (राजानम्) संभृते शिखिनि गृह-उपवने एव गूढम् आदधुः ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तमिति॥ पश्चिमक्रतुविदाऽन्त्येष्टिविधिज्ञेन पुरोधसा संगताः समेता मन्त्रिणो गृहोपवन एव गृहाराम एव।
आरामः स्यादुपवनम् इत्यमरः (अमरकोशः २.४.२ ) । दोगशान्तिमपदिश्य शान्तिकर्म व्यपदिश्य तमग्निवर्णं संभृते समिद्धे शिखिन्यग्नौ गूढमप्रकाशमादधुर्निदधुः ॥
Summary
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The ministers, along with the priest who knew the final rites, secretly placed him (the deceased king) on a prepared pyre in the palace garden, under the pretext of performing a ritual for curing his disease.
सारांश
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मंत्रियों और पुरोहित ने राजा की मृत्यु को गुप्त रखा और रोग-शांति के अनुष्ठान के बहाने महल के उपवन में ही उनका अग्नि संस्कार कर दिया।
पदच्छेदः
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| तम् | तद् (२.१) | him |
| गृहोपवने | गृह–उपवन (७.१) | in the palace garden |
| एव | एव | itself |
| सङ्गताः | सङ्गत (सम्√गम्+क्त, १.३) | gathered |
| पश्चिमक्रतुविदा | पश्चिम–क्रतु–विद् (३.१) | with the one who knows the final rites |
| पुरोधसा | पुरोधस् (३.१) | with the priest |
| रोगशान्तिम् | रोग–शान्ति (२.१) | the cure of the disease |
| अपदिश्य | अपदिश्य (अप√दिश्+ल्यप्) | using as a pretext |
| मन्त्रिणः | मन्त्रिन् (१.३) | the ministers |
| संभृते | संभृत (सम्√भृ+क्त, ७.१) | on the prepared |
| शिखिनि | शिखिन् (७.१) | on the fire (pyre) |
| गूढम् | गूढम् | secretly |
| आदधुः | आदधुः (आ√धा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | placed |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | गृ | हो | प | व | न | ए | व | सं | ग | ग | |
| ताः | प | श्चि | म | क्र | तु | वि | दा | पु | रो | ध | सा |
| रो | ग | शा | न्ति | म | प | दि | श्य | म | न्त्रि | णः | |
| सं | भृ | ते | श | इ | खि | नि | गू | ढ | मा | द | धुः |
| र | न | र | ल | ग | |||||||
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