अन्वयः
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वेणुना दशन-पीडित-अधराः, वीणया नख-पद-अङ्कित-उरवः, उभयेन शिल्प-कार्ये वेजिताः विजिह्य-नयनाः (अङ्गनाः) तम् व्यलोभयन्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
वेणुनेति॥ दशनैः पीडिताधरादष्टोष्ठाः। नखपदैर्नखक्षतैरङ्कितोरवश्चिह्नितोत्सङ्गाः। व्रणिताधरोरुत्वादक्षमा इत्यर्थः। तथापि वेणुना वीणया चेत्युभयेन। अधरोरुपीडाकरेणेत्यर्तः। वेजिताः पीडिताः शिल्पं वेणुवीणावाद्यादिकं कुर्वन्तीति शिल्पकार्यो गायिकाः।
कर्मण्यण् (अष्टाध्यायी ३.२.१ ) इत्यण्। टिड्ढाणञ्- (अष्टाध्यायी ४.१.१५ ) इत्यादिना ङीप्। तं विजिह्यनयनाः कुटिलदृष्टयः सत्यः। स्वं चेष्टितं जानन्नपि वृथा नः पीडयतीति साभिप्रायं पश्यन्त्य इत्यर्थः । व्यलोभयन्। तथाविधालोकनमपि तस्याकर्षकमेवाभूदिति भावः ॥
Summary
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Women with sidelong glances tempted him. Competing in their artistic skills, some played the flute, pressing their lips with their teeth, while others played the vīṇā, marking their chests with their fingernails.
सारांश
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बाँसुरी और वीणा सीखने के बहाने होंठों और जाँघों पर लगे निशानों से स्त्रियाँ परेशान तो हुईं, परंतु अपनी तिरछी चितवन से राजा को मोहित भी किया।
पदच्छेदः
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| वेणुना | वेणु (३.१) | with a flute |
| दशनपीडिताधराः | दशन–पीडित–अधरा (१.३) | whose lips were pressed by their teeth |
| वीणया | वीणा (३.१) | with a vīṇā |
| नखपदाङ्कितोरवः | नख–पद–अङ्कित–उरस् (१.३) | whose chests were marked by fingernails |
| शिल्पकार्ये | शिल्प–कार्य (७.१) | in the artistic performance |
| उभयेन | उभय (३.१) | by both |
| वेजिताः | वेजित (√वेज्+णिच्+क्त, १.३) | made to compete |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| विजिह्यनयनाः | विजिह्म–नयना (१.३) | with sidelong glances |
| व्यलोभयन् | व्यलोभयन् (वि√लुभ् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they enticed |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वे | णु | ना | द | श | न | पी | डि | ता | ध | रा |
| वी | ण | या | न | ख | प | दा | ङ्कि | तो | र | वः |
| शि | ल्प | का | र्य | उ | भ | ये | न | वे | जि | ता |
| स्तं | वि | जि | ह्य | न | य | ना | व्य | लो | भ | यन् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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