अन्वयः
AI
दूति-कृत-मार्ग-दर्शनः सः क्लृप्त-पुष्प-शयनान् लता-गृहान् एत्य अवरोध-भय-वेपथु-उत्तरम् परिजन-अङ्गना-रतम् अन्वभूत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
क्लृप्तेति॥ सोऽग्निवर्णो दूतिभिः कृतमार्गदर्शनः सन्। क्लृप्तपुष्पशयनाँल्लतागृहानेत्य। अवरोधादन्तःपुरजनाद्भयेन यो वेपथुः कम्पस्तदुत्तरं तप्रधानं यथा तथा परिजनाङ्गनारतं दासीरतमन्वभूत्। परिजनश्चासावङ्गना चेति विग्रहः। अत्र छीबन्तस्यापि
दूती शब्दस्य छन्दोभङ्गभयाद्ध्रस्वत्वं कृतम्। अपि माषं मषं कुर्याच्छन्दोभङ्गं त्यजेद्गिराम् इत्युपदेशात् ॥
Summary
AI
Guided by a female messenger, he went to the bower-houses where flower-beds were prepared and experienced love-making with a servant-woman, an act accompanied by her trembling from fear of the queens in the royal harem.
सारांश
AI
दूतियों के बताए मार्ग से पुष्पों वाले लता-गृहों में जाकर राजा ने रानियों के भय से कांपते हुए परिचारिकाओं के साथ विहार किया।
पदच्छेदः
AI
| क्लृप्तपुष्पशयनान् | क्लृप्त–पुष्प–शयन (२.३) | where flower-beds were arranged |
| लतागृहान् | लता–गृह (२.३) | the bower-houses |
| एत्य | एत्य (आ√इ+ल्यप्) | having gone |
| दूतिकृतमार्गदर्शनः | दूति–कृत–मार्ग–दर्शन (१.१) | he for whom the path was shown by a female messenger |
| अन्वभूत् | अन्वभूत् (अनु√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he experienced |
| परिजनाङ्गनारतम् | परिजन–अङ्गना–रत (२.१) | love-making with a servant-woman |
| सः | तद् (१.१) | he |
| अवरोधभयवेपथूत्तरम् | अवरोध–भय–वेपथु–उत्तर (२.१) | accompanied by trembling from fear of the queens |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्लृ | प्त | पु | ष्प | श | य | ना | ल्ल | ता | गृ | हा |
| ने | त्य | दू | ति | कृ | त | मा | र्ग | द | र्श | नः |
| अ | न्व | भू | त्प | रि | ज | ना | ङ्ग | ना | र | तं |
| सो | ऽव | रो | ध | भ | य | वे | प | थू | त्त | रम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.