प्रातरेत्य परिभोगशोभिना
दर्शनेन कृतखण्डनव्यथाः ।
प्राञ्जलिः प्रणयिनीः प्रसादय-
न्सोऽदुनोत्प्रणयमन्थरः पुनः ॥
प्रातरेत्य परिभोगशोभिना
दर्शनेन कृतखण्डनव्यथाः ।
प्राञ्जलिः प्रणयिनीः प्रसादय-
न्सोऽदुनोत्प्रणयमन्थरः पुनः ॥
दर्शनेन कृतखण्डनव्यथाः ।
प्राञ्जलिः प्रणयिनीः प्रसादय-
न्सोऽदुनोत्प्रणयमन्थरः पुनः ॥
अन्वयः
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प्रणय-मन्थरः सः प्रातः एत्य, परिभोग-शोभिना दर्शनेन कृत-खण्डन-व्यथाः प्रणयिनीः प्राञ्जलिः सन् प्रसादयन्, पुनः अदुनोत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रातरिति॥ सोऽग्निवर्णः प्रातरेत्यागत्य परिभोगशोभिना दर्शनेन हेतुना। दृशेर्ण्यन्ताल्ल्युट्। कृता खण्डनव्यथा यासां तास्तथोक्ताः खण्डिता इत्यर्थः। तदुक्तम्-
ज्ञातेऽन्यासङ्गविकृते खण्डितेर्ष्याकषायिता इति। प्रणयिनीः प्राञ्जलिः प्रसादयंस्तथापि प्रणयमन्थरः प्रणयेन नर्तकीगतेन मन्थरोऽलसः। तत्र शिथिलप्रयत्नः सन्नित्यर्थः। पुनरदुनोत् पर्यतापयत् ॥
Summary
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Slow in his affection, he would come in the morning and, while appeasing his beloveds with folded hands—whose pain from his infidelity was mitigated by his appearance radiant from the night's pleasures—he would pain them again.
सारांश
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प्रातःकाल संभोग के चिह्नों से युक्त राजा ने हाथ जोड़कर अपनी रुष्ट पत्नियों को मनाया, जिससे उनके प्रेम में और भी वृद्धि हुई।
पदच्छेदः
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| प्रातः | प्रातर् | In the morning |
| एत्य | एत्य (आ√इ+ल्यप्) | having come |
| परिभोगशोभिना | परिभोग–शोभिन् (३.१) | shining with (the marks of) enjoyment |
| दर्शनेन | दर्शन (३.१) | by his appearance |
| कृतखण्डनव्यथाः | कृत–खण्डन–व्यथा (२.३) | those whose pain was caused by his infidelity |
| प्राञ्जलिः | प्राञ्जलि (१.१) | with folded hands |
| प्रणयिनीः | प्रणयिनी (२.३) | his beloveds |
| प्रसादयन् | प्रसादयत् (प्र√सद्+णिच्+शतृ, १.१) | appeasing |
| सः | तद् (१.१) | he |
| अदुनोत् | अदुनोत् (√दु कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | pained |
| प्रणयमन्थरः | प्रणय–मन्थर (१.१) | slow in affection |
| पुनः | पुनर् | again |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | त | रे | त्य | प | रि | भो | ग | शो | भि | ना |
| द | र्श | ने | न | कृ | त | ख | ण्ड | न | व्य | थाः |
| प्रा | ञ्ज | लिः | प्र | ण | यि | नीः | प्र | सा | द | य |
| न्सो | ऽदु | नो | त्प्र | ण | य | म | न्थ | रः | पु | नः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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