अन्वयः
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अङ्क-परिवर्तन-उचिते तस्य अङ्कम् हृदयंगम-स्वना वल्लकी च, वल्गु-वाक् वाम-लोचना अपि च, उमे अशून्यताम् निन्यतुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अङ्कमिति॥ अङ्कपरिवर्तनोचिते उत्सङ्गविहारार्हे उमे तस्याग्निवर्णस्याङ्कमशून्यतां पूर्णतां निन्यतुः। के उभे? हृदयंगमस्वना मनोहरध्वनिर्वल्लकी वीणा च। वल्गुवाङ्मुधुरभाषिणी वामलोचना कामिन्यपि च हृदयं गच्छतीति हृदयंगमः। खच्प्रकरणे गमेः सुप्युपसंख्यानात्खच्प्रत्ययः। अङ्काधिरोपितयोर्वीणा-वामाक्ष्योर्वाद्य-गीताभ्यामरंस्तेत्यर्थः ॥
Summary
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Both the lute with its heart-touching sound and the beautiful-eyed woman with her charming speech brought his lap, accustomed to being occupied by one and then the other, to a state of non-emptiness.
सारांश
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राजा की गोद में सदैव दो चीजें स्थान बदलती रहती थीं—एक मधुर स्वर वाली वीणा और दूसरी चंचल नेत्रों वाली मधुर भाषिणी सुंदरी।
पदच्छेदः
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| अङ्कम् | अङ्क (२.१) | the lap |
| अङ्कपरिवर्तनोचिते | अङ्क–परिवर्तन–उचित (२.१) | which was accustomed to being occupied by one then the other |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| निन्यतुः | निन्यतुः (√नी कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | brought |
| अशून्यताम् | अशून्यता (२.१) | to a state of non-emptiness |
| उमे | उभ (१.२) | both |
| वल्लकी | वल्लकी (१.१) | the lute |
| च | च | and |
| हृदयंगमस्वना | हृदयंगम–स्वन (१.१) | with heart-touching sound |
| वल्गुवाक् | वल्गु–वाच् (१.१) | with charming speech |
| अपि | अपि | also |
| च | च | and |
| वामलोचना | वाम–लोचन (१.१) | the beautiful-eyed woman |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ङ्क | म | ङ्क | प | रि | व | र्त | नो | चि | ते |
| त | स्य | नि | न्य | तु | र | शू | न्य | ता | मु | मे |
| व | ल्ल | की | च | हृ | द | यं | ग | म | स्व | ना |
| व | ल्गु | वा | ग | पि | च | वो | म | लो | च | ना |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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