तेन द्विपानामिव पुण्डरीको
राज्ञामजय्योऽजनि पुण्डरीकः ।
शान्ते पितर्याहृतपुण्डरीका
यं पुण्डरीकाक्षमिव श्रिता श्रीः ॥

अन्वयः AI तेन राज्ञाम् अजय्यः, द्विपानां पुण्डरीकः इव, पुण्डरीकः (नाम पुत्रः) अजनि । पितरि शान्ते (सति), आहृतपुण्डरीका श्रीः पुण्डरीकाक्षम् इव यं श्रिता ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) तेनेति॥ तेन नभसा। द्विपानां पुण्डरीको दिग्गजविशेष इव। राज्ञाः मजय्यो जेतुमशक्यः। क्षय्यजय्यौ शक्यार्थे (अष्टाध्यायी ६.१.८१ ) इति निपातनात्साधुः। पुण्डरीकः पुण्डकाख्यः पुत्रोऽजनि जनितः। पितरि शान्ते स्वर्गं गते सति। आहृतपुण्डरीका गृहीतश्वेतपद्मा श्रीर्यं पुण्डरीकं पुण्डरीकाक्षं विष्णुमिव श्रिता ॥
Summary AI By Nabhas, a son named Pundarika was born, who was as unconquerable among kings as a Pundarika elephant is among other elephants. When his father passed away, the goddess Shri (Fortune), holding a white lotus, resorted to him, just as she resorts to the lotus-eyed Vishnu.
सारांश AI नभस से पुण्डरीक नामक पुत्र हुआ जो राजाओं में वैसे ही अजेय था जैसे हाथियों में पुण्डरीक हाथी। पिता के वन जाने पर राजलक्ष्मी ने उनका वैसे ही आश्रय लिया जैसे वे साक्षात् विष्णु हों।
पदच्छेदः AI
तेनतद् (३.१) by him (Nabhas)
द्विपानाम्द्विप (६.३) of elephants
इवइव like
पुण्डरीकःपुण्डरीक (१.१) a 'Pundarika' elephant
राज्ञाम्राजन् (६.३) of kings
अजय्यःअजय्य (√जि+ण्यत्, १.१) unconquerable
अजनिअजनि (√जन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) was born
पुण्डरीकःपुण्डरीक (१.१) Pundarika (by name)
शान्तेशान्त (√शम्+क्त, ७.१) when (he) had attained peace
पितरिपितृ (७.१) his father
आहृतपुण्डरीकाआहृतपुण्डरीक (१.१) she who holds a white lotus
यम्यद् (२.१) whom
पुण्डरीकाक्षम्पुण्डरीकअक्षि (२.१) the lotus-eyed one (Vishnu)
इवइव like
श्रिताश्रित (√श्रि+क्त, १.१) resorted to
श्रीःश्री (१.१) the goddess Shri (Lakshmi)
छन्दः इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
ते द्वि पा ना मि पु ण्ड री को
रा ज्ञा य्यो ऽज नि पु ण्ड री कः
शा न्ते पि र्या हृ पु ण्ड री का
यं पु ण्ड री का क्ष मि श्रि ता श्रीः
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.