प्रतिकृतिरचनाभ्यो दूतिसंदर्शिताभ्यः
समधिकतररूपाः शुद्धसंतानकामैः ।
अधिविविदुरमात्यैराहृतास्तस्य यूनः
प्रथमपरिगृहीते श्रीभुवौ राजकन्याः ॥
प्रतिकृतिरचनाभ्यो दूतिसंदर्शिताभ्यः
समधिकतररूपाः शुद्धसंतानकामैः ।
अधिविविदुरमात्यैराहृतास्तस्य यूनः
प्रथमपरिगृहीते श्रीभुवौ राजकन्याः ॥
समधिकतररूपाः शुद्धसंतानकामैः ।
अधिविविदुरमात्यैराहृतास्तस्य यूनः
प्रथमपरिगृहीते श्रीभुवौ राजकन्याः ॥
अन्वयः
AI
शुद्ध-संतान-कामैः अमात्यैः आहृताः, दूति-संदर्शिताभ्यः प्रतिकृति-रचनाभ्यः समधिकतररूपाः राजकन्याः तस्य यूनः (भार्याः) अधिविविदुः, यस्य श्रीभुवौ प्रथमपरिगृहीते (आस्ताम्)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रतिकृतीति॥ दूतिभिः कन्यापरीक्षणार्थं प्रेषिताभिः संदर्शिताभ्यो दूतिसंदर्शिताभ्यः प्रतिकृतीनां तूलिकादिलिखितकन्याप्रतिमानां रचनाभ्यो विन्यासेभ्यः।
पञ्चमी विभक्ते (अष्टाध्यायी २.३.४२ ) इति पञ्चमी। समधिकतररूपाः। चित्रनिर्माणादपि रमणीयनिर्माणा इत्यर्थः। शुद्धसंतानकामैरमात्यैराहृता आनीता राजकन्या यूनस्तस्य सुदर्शनस्य संबन्धिन्यौ प्रथमपरिगृहीते श्रीभुवौ श्रीश्च भूश्च ते अधिविविदुरधिविन्ने चक्रुः। आत्मना सपत्नीभावं चक्रुरित्यर्थः। कृतसापत्निकाध्यूढाधिविन्ना इत्यमरः (अमरकोशः २.६.७ ) ॥
Summary
AI
Desiring a pure lineage for him, his ministers brought princesses who were even more beautiful than their portraits shown by messengers. These princesses married the young king, for whom Royal Fortune (Śrī) and the Earth (Bhū) were already the first-wedded wives.
सारांश
AI
दूतियों द्वारा दिखाए गए चित्रों से भी अधिक सुंदर और मंत्रियों द्वारा लाई गई उत्तम कुल की राजकन्याओं ने उस युवक राजा की पूर्व पत्नियों, लक्ष्मी और पृथ्वी, की सौतन बनकर महल में प्रवेश किया।
पदच्छेदः
AI
| प्रतिकृतिरचनाभ्यः | प्रतिकृति–रचना (५.३) | than the painted portraits |
| दूतिसंदर्शिताभ्यः | दूति–संदर्शित (५.३) | shown by the female messengers |
| समधिकतररूपाः | समधिकतर–रूप (१.३) | possessing far more beauty |
| शुद्धसंतानकामैः | शुद्ध–संतान–काम (३.३) | by those who desired a pure lineage |
| अधिविविदुः | अधिविविदुः (अधि√विद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | married |
| अमात्यैः | अमात्य (३.३) | by the ministers |
| आहृताः | आहृत (आ√हृ+क्त, १.३) | brought |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| यूनः | युवन् (६.१) | of the youth |
| प्रथमपरिगृहीते | प्रथम–परिगृहीत (१.२) | the first-wedded |
| श्रीभुवौ | श्री–भू (१.२) | Fortune (Śrī) and the Earth (Bhū) |
| राजकन्याः | राज–कन्या (१.३) | the princesses |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ति | कृ | ति | र | च | ना | भ्यो | दू | ति | सं | द | र्शि | ता | भ्यः |
| स | म | धि | क | त | र | रू | पाः | शु | द्ध | सं | ता | न | का | मैः |
| अ | धि | वि | वि | दु | र | मा | त्यै | रा | हृ | ता | स्त | स्य | यू | नः |
| प्र | थ | म | प | रि | गृ | ही | ते | श्री | भु | वौ | रा | ज | क | न्याः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.