उरस्यपर्याप्तनिवेशभागा
प्रौढीभविष्यन्तमुदीक्षमाणा ।
संजातलज्जेव तमातपत्र-
च्छायाछलेनोपजुगूह लक्ष्मीः ॥

अन्वयः AI उरसि अपर्याप्त-निवेश-भागा (सती) प्रौढीभविष्यन्तम् तम् उदीक्षमाणा लक्ष्मीः, संजात-लज्जा इव, आतपत्र-छाया-छलेन उपजुगूह।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) उरसीति॥ उरस्यपर्याप्तो निवेशभागो निवासावकाशो यस्याः सा। अत एव प्रौढीभविष्यन्तं वर्धिषथ्यमाणमुदीक्षमाणा प्रौढवपुष्मान्भविष्यतीति प्रतीक्षमाणा लक्ष्मीः संजातलज्जेव साक्षादालिङ्गितुं लज्जितेव तं सुदर्शनम्। आतपत्रच्छायाछलेनोपजुगूहालिलिङ्ग। छत्रच्छाया लक्ष्मीरूपेति प्रसिद्धिः। प्रौढाङ्गनायाः प्रौढपुरुषालाभे लज्जा भवतीति ध्वनिः ॥
Summary AI The Goddess Lakshmi, finding insufficient space on his chest and anticipating his future growth, seemed to become shy and concealed him under the pretext of the royal umbrella's shade.
सारांश AI बालक राजा के वक्षस्थल पर स्थान न पाकर, उसके वयस्क होने की प्रतीक्षा करती हुई राजलक्ष्मी ने मानो लज्जावश छत्र की छाया के बहाने उसे हृदय से लगा लिया।
पदच्छेदः AI
उरसिउरस् (७.१) on his chest
अपर्याप्तनिवेशभागाअपर्याप्तनिवेशभाग (१.१) finding insufficient space to settle
प्रौढीभविष्यन्तम्प्रौढीभविष्यन्त (√प्रौढीभविष्यत्+शतृ, २.१) him who was going to grow large
उदीक्षमाणाउदीक्षमाण (उद्√ईक्ष्+शानच्, १.१) anticipating
संजातलज्जासंजातलज्जा (१.१) as if overcome with shyness
इवइव as if
तम्तद् (२.१) him
आतपत्रच्छायाछलेनआतपत्रछायाछल (३.१) under the pretext of the shade of the royal umbrella
उपजुगूहउपजुगूह (उप√गुह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) concealed
लक्ष्मीःलक्ष्मी (१.१) the Goddess Lakshmi
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
स्य र्या प्त नि वे भा गा
प्रौ ढी वि ष्य न्त मु दी क्ष मा णा
सं जा ज्जे मा त्र
च्छा या ले नो जु गू क्ष्मीः
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