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न्यस्ताक्षरामक्षरभूमिकायां
कार्त्स्न्येन गृह्णाति लिपिं न यावत् ।
सर्वाणि तावच्छ्रुतवृद्धयोगा-
त्फलान्युपायुङ्क्त स दण्डनीतेः ॥

अन्वयः AI सः अक्षर-भूमिकायाम् न्यस्त-अक्षराम् लिपिम् यावत् कार्त्स्न्येन न गृह्णाति, तावत् श्रुत-वृद्ध-योगात् दण्डनीतेः सर्वाणि फलानि उपायुङ्क्त।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) न्यस्तेति॥ अक्षरभूमिकायामक्षरलेखनस्थले न्यस्ताक्षरां रचिताक्षरपङ्क्तिरेखान्यासां लिपिं पञ्चाशद्वर्णात्मिकां कार्त्स्न्येन यावन्न गृह्णाति स सुदर्शनस्तावच्छ्रुतवृद्धयोगाद्विद्यावृद्धसंसर्गात्सर्वाणि दण्डनीतेर्दण्डशास्त्रस्य फलान्युपायुङ्क्तान्वभूत्॥ प्रागेव बद्धफलस्य तस्य पश्चादभ्यस्यामानं शास्त्रं संवादार्थमिवाभवदित्यर्थः ॥
Summary AI Before he could even fully master the script with its letters set on the writing tablet, he, through association with learned elders, was already enjoying all the fruits of political science (Dandaniti).
सारांश AI जब तक उसने शिक्षा की पट्टी पर अक्षरों को पूरी तरह लिखना भी नहीं सीखा था, उससे पहले ही उसने वृद्धों और विद्वानों की संगति से राजनीति के सभी फलों का उपयोग करना शुरू कर दिया था।
पदच्छेदः AI
न्यस्ताक्षराम्न्यस्तअक्षर (२.१) with letters set down
अक्षरभूमिकायाम्अक्षरभूमिका (७.१) on the writing tablet
कार्त्स्न्येनकार्त्स्न्य (३.१) completely
गृह्णातिगृह्णाति (√ग्रह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) learns
लिपिम्लिपि (२.१) the script
not
यावत्यावत् before
सर्वाणिसर्व (२.३) all
तावत्तावत् by that time
श्रुतवृद्धयोगात्श्रुतवृद्धयोग (५.१) from association with learned elders
फलानिफल (२.३) the fruits
उपायुङ्क्तउपायुङ्क्त (उप√युज् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) enjoyed
सःतद् (१.१) he
दण्डनीतेःदण्डनीति (६.१) of political science
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
न्य स्ता क्ष रा क्ष भू मि का यां
का र्त्स्न्ये गृ ह्णा ति लि पिं या वत्
र्वा णि ता च्छ्रु वृ द्ध यो गा
त्फ ला न्यु पा यु ङ्क्त ण्ड नी तेः
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