तस्मादधधः किंचिदिवावतीर्णावसंस्पृशन्तौ तपनीयपीठम् । सालक्तकौ भूपतयः प्रसिद्धैर्ववन्दिरे मौलिभिरस्य पादौ ॥
तस्मादधधः किंचिदिवावतीर्णावसंस्पृशन्तौ तपनीयपीठम् । सालक्तकौ भूपतयः प्रसिद्धैर्ववन्दिरे मौलिभिरस्य पादौ ॥
अन्वयः
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भूपतयः तस्मात् (सिंहासनात्) अधः-अधः किंचित् इव अवतीर्णौ, तपनीय-पीठम् असंस्पृशन्तौ, स-अलक्तकौ अस्य पादौ प्रसिद्धैः मौलिभिः ववन्दिरे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्मादिति॥ तस्मात्सिंहासनादपादानात् अधोऽधोदेशं प्रति किंचिदिवावतीर्णावीषल्लम्बौ तपनीयपीठं काञ्चनपीठमसंस्पृशन्तौ अल्पकत्वादव्याप्तौ सालक्तकौ लाक्षारसावसिक्तावस्य सुदर्शनस्य पादौ भूपतयः प्रसिद्धैरुन्नतैर्मौलिभिर्मुकुटैर्ववन्दिरे प्रणेमुः ॥
Summary
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Vassal kings bowed with their famous crowns to his two feet, which were adorned with red lac dye. Dangling a little below the high throne, his feet did not even touch the golden footstool.
सारांश
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सुवर्ण के पादपीठ को स्पर्श न करते हुए, सिंहासन से थोड़े नीचे लटके हुए राजा के महावर लगे चरणों की अन्य राजाओं ने अपने प्रसिद्ध मुकुटों से वंदना की।
पदच्छेदः
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| तस्मात् | तद् (५.१) | from it (the throne) |
| अधः-अधः | अधः-अधः | down below |
| किंचित् | किंचित् | a little |
| इव | इव | as it were |
| अवतीर्णौ | अवतीर्ण (अव√तॄ+क्त, २.२) | dangling |
| असंस्पृशन्तौ | असंस्पृशत् (सम्√स्पृश्+शतृ, २.२) | not touching |
| तपनीयपीठम् | तपनीय–पीठ (२.१) | the golden footstool |
| सालक्तकौ | स–अलक्तक (२.२) | adorned with red lac |
| भूपतयः | भूपति (१.३) | The kings |
| प्रसिद्धैः | प्रसिद्ध (प्र√सिध्+क्त, ३.३) | with famous |
| ववन्दिरे | ववन्दिरे (√वन्द् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | bowed to |
| मौलिभिः | मौलि (३.३) | crowns |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| पादौ | पाद (२.२) | two feet |
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