अन्वयः
AI
कुशस्य पौत्रः अपि, कुशेशयाक्षः, सागरधीरचेताः, पुरार्गलादीर्घभुजः, एकवीरः (सः) ससागरां एकातपत्रां भुवम् बुभोज ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पौत्र इति॥ कुशेशयाक्षः शतपत्रलोचनः।
शतपत्रं कुशेशयम् इत्यमरः (अमरकोशः १.१०.४० ) । सागरधीरचेताः समुद्रगम्भीरचित्त एकवीरोऽसहायशूरः। पुरस्यार्गला कपाटविष्कम्भः। तद्विष्कम्भोऽर्गलं न ना इत्यमरः (अमरकोशः २.२.१८ ) । तद्वद्दीर्घभुजः कुशस्य पौत्रो निषधोऽपि ससागरामेकातपत्रां भुवं बुभोज पालयामास। भुजोऽनवने (अष्टाध्यायी १.३.६६ ) इति नियमात् परस्मैपदम् ॥
Summary
AI
Nishadha, the grandson of Kusha, who was lotus-eyed, whose mind was as steady as the ocean, whose long arms resembled city gate-bars, and who was the sole hero, ruled the entire earth with its oceans under a single royal umbrella.
सारांश
AI
कुश के पौत्र, कमल के समान नेत्रों वाले और समुद्र के समान गंभीर हृदय वाले पराक्रमी राजा ने अपनी विशाल भुजाओं के बल पर संपूर्ण पृथ्वी पर एकछत्र शासन किया।
पदच्छेदः
AI
| पौत्रः | पौत्र (१.१) | the grandson (Nishadha) |
| कुशस्य | कुश (६.१) | of Kusha |
| अपि | अपि | also |
| कुशेशयाक्षः | कुशेशय–अक्षि (१.१) | the lotus-eyed one |
| ससागराम् | स–सागर (२.१) | along with its oceans |
| सागरधीरचेताः | सागर–धीर–चेतस् (१.१) | one whose mind was as steady as the ocean |
| एकातपत्रां | एक–आतपत्र (२.१) | under a single royal umbrella |
| भुवम् | भू (२.१) | the earth |
| एकवीरः | एक–वीर (१.१) | the sole hero |
| पुरार्गलादीर्घभुजः | पुर–अर्गल–दीर्घ–भुज (१.१) | one whose long arms were like the gate-bars of a city |
| बुभोज | बुभोज (√भुज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | ruled |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पौ | त्रः | कु | श | स्या | पि | कु | शे | श | या | क्षः |
| स | सा | ग | रां | सा | ग | र | धी | र | चे | ताः |
| ए | का | त | प | त्रां | भु | व | मे | क | वी | रः |
| पु | रा | र्ग | ला | दी | र्घ | भु | जो | बु | भो | ज |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.