अन्वयः
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अप्रौढ-नरेन्द्रम् तत् रघोः कुलम् नव-इन्दुना नभसा, शाव-एक-सिंहेन काननेन, कुड्मल-पुष्करेण तोयेन च उपमेयम् आसीत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
नवेति॥ अप्रौढनरेन्द्रं तद्रघोः कुलं नवेन्दुना बालचन्द्रेण नभसा व्योम्ना। शावः शिशुरेकः सिंहो यस्मिन्।
पृथुकः शावकः शिशुः इत्यमरः (अमरकोशः २.५.४० ) । तेन काननेन च। कुड्मलं कुड्मलावस्थं पुष्करं पङ्कजं यस्मिंस्तेन तोयेन चोपमेयमुपमातुमर्हम्। आसीत्। नवेन्द्वाद्युपमानेन तस्य वर्धिष्णुताशौर्यश्रीमत्त्वानि सूचितानि ॥
Summary
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The dynasty of Raghu, with its young king Sudarshana, was comparable to the sky graced by a new moon, a forest inhabited by a single lion cub, and a pond adorned with a budding lotus.
सारांश
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उस बालक राजा से रघुवंश वैसा ही सुशोभित हुआ जैसे बाल-चंद्रमा से आकाश, सिंह-शावक से वन और कमल की कली से सरोवर सुंदर लगता है।
पदच्छेदः
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| नवेन्दुना | नव–इन्दु (३.१) | with a new moon |
| तत् | तद् (१.१) | That |
| नभसा | नभस् (३.१) | the sky |
| उपमेयं | उपमेय (१.१) | was comparable |
| शावैकसिंहेन | शाव–एक–सिंह (३.१) | with a single lion cub |
| च | च | and |
| काननेन | कानन (३.१) | a forest |
| रघोः | रघु (६.१) | of Raghu |
| कुलं | कुल (१.१) | dynasty |
| कुड्मलपुष्करेण | कुड्मल–पुष्कर (३.१) | with a budding lotus |
| तोयेन | तोय (३.१) | a body of water |
| च | च | and |
| अप्रौढनरेन्द्रम् | अप्रौढ–नरेन्द्र (१.१) | with its young king |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | वे | न्दु | ना | त | न्न | भ | सो | प | मे | यं |
| शा | वै | क | सिं | हे | न | च | का | न | ने | न |
| र | घोः | कु | लं | कु | ड्म | ल | पु | ष्क | रे | ण |
| तो | ये | न | चा | प्रौ | ढ | न | रे | न्द्र | मा | सीत् |
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