सुते शिशावेव सुदर्शनाख्ये
दर्शात्ययेन्दुप्रियदर्शने सः ।
मृगायताक्षो मृगयाविहारी
सिंहादवापद्विपदं नृसिंहः ॥
सुते शिशावेव सुदर्शनाख्ये
दर्शात्ययेन्दुप्रियदर्शने सः ।
मृगायताक्षो मृगयाविहारी
सिंहादवापद्विपदं नृसिंहः ॥
दर्शात्ययेन्दुप्रियदर्शने सः ।
मृगायताक्षो मृगयाविहारी
सिंहादवापद्विपदं नृसिंहः ॥
अन्वयः
AI
सः नृ-सिंहः मृग-आयत-अक्षः मृगया-विहारी (सन्), सुदर्शन-आख्ये दर्श-अत्यय-इन्दु-प्रिय-दर्शने सुते शिशौ एव (सति), सिंहात् विपदम् अवापत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
सुत इति॥ मृगायताक्षो नृसिंहः पुरुषश्रेष्ठः स ध्रुवसंधिर्दर्शात्ययेन्दुप्रियदर्शने प्रतिपञ्चन्द्रनिभे सुदर्शनाख्ये सुते शिशौ सत्येव मृगयाविहारी सन्, सिंहाद्विपदं मरणमवापत्। व्यसनासक्तिरनर्थावहेति भावः ॥
Summary
AI
While his son named Sudarshana—who was as pleasant to behold as the moon just after the new moon day—was still a child, that lion among men, Dhruvasandhi, who had large deer-like eyes and was fond of hunting, was killed by a lion.
सारांश
AI
जब उनका पुत्र सुदर्शन अभी छोटा ही था, तब शिकार के प्रेमी उन नरश्रेष्ठ राजा की वन में एक सिंह के हमले से अकाल मृत्यु हो गई।
पदच्छेदः
AI
| सुते | सुत (७.१) | while his son |
| शिशौ | शिशु (७.१) | was a child |
| एव | एव | just |
| सुदर्शनाख्ये | सुदर्शन–आख्य (७.१) | named Sudarshana |
| दर्शात्ययेन्दुप्रियदर्शने | दर्श–अत्यय–इन्दु–प्रिय–दर्शन (७.१) | who was as pleasant to see as the moon after the new-moon day |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मृगायताक्षः | मृग–आयत–अक्षि (१.१) | with large deer-like eyes |
| मृगयाविहारी | मृगया–विहारिन् (१.१) | fond of hunting |
| सिंहात् | सिंह (५.१) | from a lion |
| अवापत् | अवाप (अव√आप् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | met |
| विपदं | विपद् (२.१) | with calamity |
| नृसिंहः | नृ–सिंह (१.१) | the lion among men |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | ते | शि | शा | वे | व | सु | द | र्श | ना | ख्ये |
| द | र्शा | त्य | ये | न्दु | प्रि | य | द | र्श | ने | सः |
| मृ | गा | य | ता | क्षो | मृ | ग | या | वि | हा | री |
| सिं | हा | द | वा | प | द्वि | प | दं | नृ | सिं | हः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.