वंशस्थितिं वंशकरेण तेन
संभाव्य भावी स सखा मघोनः ।
उपस्पृशन्स्पर्शनिवृत्तलौल्य-
स्त्रिपुष्करेषु त्रिदशत्वमाप ॥
वंशस्थितिं वंशकरेण तेन
संभाव्य भावी स सखा मघोनः ।
उपस्पृशन्स्पर्शनिवृत्तलौल्य-
स्त्रिपुष्करेषु त्रिदशत्वमाप ॥
संभाव्य भावी स सखा मघोनः ।
उपस्पृशन्स्पर्शनिवृत्तलौल्य-
स्त्रिपुष्करेषु त्रिदशत्वमाप ॥
अन्वयः
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भावी मघोनः सखा सः (ब्रह्मिष्ठः), वंश-करेण तेन वंश-स्थितिम् सम्भाव्य, स्पर्श-निवृत्त-लौल्यः (सन्) त्रि-पुष्करेषु उपस्पृशन् त्रिदशत्वम् आप ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
वंशेति॥ स्पृश्यन्त इति स्पर्शा विषयाः। तेभ्यो निवृत्तलौल्यो निवृत्ततृष्णः। अत एव मघोन इन्द्रस्य सखा मित्रं भावी भविष्यन्। स्वर्गं जिगमिषुरित्यर्थः। स ब्रह्मिष्णो वंशकरेण वंशप्रवर्तकेन तेन पुत्रेण वंशस्थितिं कुलप्रतिष्ठां संभाव्य संपाद्य। त्रिषु पुष्करेषु तीर्थविशेषेषु।
दिक्संख्ये संज्ञायाम् (अष्टाध्यायी २.१.५७ ) इति समासः। उपस्पृशन् स्नानं कुर्वन्। त्रिदशत्वं देवभूयमाप ॥
Summary
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That king Brahmishtha, destined to become a friend of Indra, secured the continuation of his lineage through that son. Then, having become free from the craving for sensory pleasures, he attained divinity while performing ablutions at the three sacred Pushkara lakes.
सारांश
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पुत्र द्वारा वंश की रक्षा का भार सुनिश्चित कर, इन्द्र के मित्र उस राजा ने विषयों से मोह त्यागकर पुष्कर तीर्थ में शरीर त्यागकर देवत्व प्राप्त किया।
पदच्छेदः
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| वंशस्थितिं | वंश–स्थिति (२.१) | the continuation of the dynasty |
| वंशकरेण | वंश–कर (३.१) | by the dynasty-perpetuator |
| तेन | तद् (३.१) | by that (son) |
| संभाव्य | संभाव्य (सम्√भू+णिच्+ल्यप्) | having ensured |
| भावी | भाविन् (१.१) | destined to be |
| सः | तद् (१.१) | he (Brahmishtha) |
| सखा | सखि (१.१) | a friend |
| मघोनः | मघवन् (६.१) | of Indra |
| उपस्पृशन् | उपस्पृशत् (उप√स्पृश्+शतृ, १.१) | performing ablutions |
| स्पर्शनिवृत्तलौल्यः | स्पर्श–निवृत्त–लौल्य (१.१) | one whose craving for sensory pleasures had ceased |
| त्रिपुष्करेषु | त्रि–पुष्कर (७.३) | at the three Pushkara lakes |
| त्रिदशत्वम् | त्रिदश–त्व (२.१) | divinity |
| आप | आप (√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attained |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वं | श | स्थि | तिं | वं | श | क | रे | ण | ते | न |
| सं | भा | व्य | भा | वी | स | स | खा | म | घो | नः |
| उ | प | स्पृ | श | न्स्प | र्श | नि | वृ | त्त | लौ | ल्य |
| स्त्रि | पु | ष्क | रे | षु | त्रि | द | श | त्व | मा | प |
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