यशोभिराब्रह्मसभं प्रकाशः
स ब्रह्मभूयं गतिमाजगाम ।
ब्रह्मिष्ठमाधाय निजेऽधिकारे
ब्रह्मिष्ठमेव स्वतनुप्रसूतम् ॥

अन्वयः AI यशोभिः आ-ब्रह्म-सभम् प्रकाशः सः, ब्रह्मिष्ठम् एव स्व-तनु-प्रसूतम् ब्रह्मिष्ठम् निजे अधिकारे आधाय, ब्रह्म-भूयम् गतिम् आजगाम ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) यशोभिरिति॥ आ ब्रह्मसभाया आब्रह्मसभं ब्रह्मसदनपर्यन्तम्। अभिविधावव्ययीभावः। यशोभिः। प्रकाशः प्रसिद्धः, स कौसल्योऽतिशयेन ब्रह्मवन्तं ब्रह्मिष्ठम्। ब्रह्मविदमित्यर्थः। ब्रह्मशब्दान्मतुबन्तादिष्ठन्प्रत्यये विन्मतोर्लुक् (अष्टाध्यायी ५.३.६५ ) इति मतुपो लुक्। नस्तद्धिते (अष्टाध्यायी ६.४.१४४ ) इति टिलोपः। ब्रह्मिष्ठं ब्रह्मिष्ठाख्यं स्वतनुप्रसूतं स्वात्मजमेव निजे स्वकीयेऽधिकारे प्रजापालनकृत्ये। आधाय निधाय। ब्रह्मणो भावो ब्रह्मभूयं ब्रह्मत्वं तदेव गतिस्तामाजगाम। मुक्तोऽभूदित्यर्थः। स्याद्द्ब्रह्मभूयं ब्रह्मत्वम् इत्यमरः। भुवो भावे क्यप् ॥
Summary AI That king Kausalya, whose fame shone up to the assembly of Brahma, attained the state of final liberation. He did so after installing his own son, Brahmishtha, who was also supremely devoted to Brahman, in his kingdom.
सारांश AI अपनी कीर्ति से ब्रह्मलोक तक प्रसिद्ध वह राजा, अपने समान ही शास्त्रों के ज्ञाता पुत्र 'ब्रह्मनिष्ठ' को राज्य सौंपकर स्वयं मोक्ष को प्राप्त हुए।
पदच्छेदः AI
यशोभिःयशस् (३.३) with his glories
आब्रह्मसभंआब्रह्मसभम् up to the assembly of Brahma
प्रकाशःप्रकाश (१.१) resplendent
सःतद् (१.१) he
ब्रह्मभूयंब्रह्मभूय (२.१) the state of Brahman
गतिम्गति (२.१) state
आजगामआजगाम (आ√गम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) attained
ब्रह्मिष्ठम्ब्रह्मिष्ठ (२.१) Brahmishtha
आधायआधाय (आ√धा+ल्यप्) having installed
निजेनिज (७.१) in his own
अधिकारेअधिकार (७.१) sovereignty
ब्रह्मिष्ठम्ब्रह्मिष्ठ (२.१) most devoted to Brahman
एवएव indeed
स्वतनुप्रसूतम्स्वतनुप्रसूत (प्र√सू+क्त, २.१) born of his own body
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
शो भि रा ब्र ह्म भं प्र का शः
ब्र ह्म भू यं ति मा गा
ब्र ह्मि ष्ठ मा धा नि जे ऽधि का रे
ब्र ह्मि ष्ठ मे स्व नु प्र सू तम्
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