अनीकिनीनां समरेऽग्रयायी
तस्यापि देवप्रतिमः सुतोऽभूत् ।
व्यश्रूयतानीकपदावसानं
देवादि नाम त्रिदिवेऽपि यस्य ॥
अनीकिनीनां समरेऽग्रयायी
तस्यापि देवप्रतिमः सुतोऽभूत् ।
व्यश्रूयतानीकपदावसानं
देवादि नाम त्रिदिवेऽपि यस्य ॥
तस्यापि देवप्रतिमः सुतोऽभूत् ।
व्यश्रूयतानीकपदावसानं
देवादि नाम त्रिदिवेऽपि यस्य ॥
अन्वयः
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तस्य अपि समरे अनीकिनीनाम् अग्रयायी देवप्रतिमः सुतः अभूत्, यस्य देवादि अनीकपदावसानं नाम त्रिदिवे अपि व्यश्रूयत ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अनीकिनीनामिति॥ तस्य क्षेमधन्वनोऽपि समरेऽनीकिनीनां चमूनामग्रयायी देवप्रतिम इन्द्रादिकल्पः सुतोऽभूत्। अनीकपदावसानमनीकशब्दान्तं देवादि देवशब्दपूर्वं यस्य नाम
देवानीक इति नामधेयं त्रिदिवे स्वर्गेऽपि व्यश्रूयत विश्रुतम् ॥
Summary
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Kshemadhanvan also had a god-like son who led armies in battle. His name, Devanika (beginning with 'Deva' and ending with 'anika'), was heard even in heaven.
सारांश
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पुण्डरीक का पुत्र देवानीक हुआ, जो युद्ध में सेना का नेतृत्व करने वाला और देवताओं के समान प्रभावशाली था। उसका नाम और कीर्ति स्वर्गलोक तक प्रसिद्ध थी।
पदच्छेदः
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| अनीकिनीनाम् | अनीकिनी (६.३) | of armies |
| समरे | समर (७.१) | in battle |
| अग्रयायी | अग्र–यायिन् (१.१) | one who goes at the forefront |
| तस्य | तद् (६.१) | his (Kshemadhanvan's) |
| अपि | अपि | also |
| देवप्रतिमः | देव–प्रतिम (१.१) | god-like |
| सुतः | सुत (१.१) | son |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was born |
| व्यश्रूयत | व्यश्रूयत (वि√श्रु भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was heard |
| अनीकपदावसानम् | अनीक–पद–अवसान (१.१) | ending with the word 'Anika' |
| देवादि | देव–आदि (१.१) | beginning with 'Deva' |
| नाम | नामन् (१.१) | name |
| त्रिदिवे | त्रिदिव (७.१) | in heaven |
| अपि | अपि | even |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | नी | कि | नी | नां | स | म | रे | ऽग्र | या | यी |
| त | स्या | पि | दे | व | प्र | ति | मः | सु | तो | ऽभूत् |
| व्य | श्रू | य | ता | नी | क | प | दा | व | सा | नं |
| दे | वा | दि | ना | म | त्रि | दि | वे | ऽपि | य | स्य |
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