इन्द्राद्वृष्टिर्नियमितगदोद्रेकवृत्तिर्यमोऽभू
द्यादोनाथः शिवजलपथः कर्मणे नौचराणाम् ।
पूर्वापेक्षी तदनु विदधे कोषवृद्धिं कुबेर
स्तस्मिन्दण्डोपनतचरितं भेजिरे लोकपालाः ॥
इन्द्राद्वृष्टिर्नियमितगदोद्रेकवृत्तिर्यमोऽभू
द्यादोनाथः शिवजलपथः कर्मणे नौचराणाम् ।
पूर्वापेक्षी तदनु विदधे कोषवृद्धिं कुबेर
स्तस्मिन्दण्डोपनतचरितं भेजिरे लोकपालाः ॥
द्यादोनाथः शिवजलपथः कर्मणे नौचराणाम् ।
पूर्वापेक्षी तदनु विदधे कोषवृद्धिं कुबेर
स्तस्मिन्दण्डोपनतचरितं भेजिरे लोकपालाः ॥
अन्वयः
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(तस्मिन् शासति) इन्द्रात् वृष्टिः (यथाकालम् अभवत्), यमः नियमितगदोद्रेकवृत्तिः अभूत्, यादोनाथः नौचराणाम् कर्मणे शिवजलपथः (अभूत्), कुबेरः पूर्वापेक्षी (सन्) तदनु कोषवृद्धिम् विदधे । (एवम्) लोकपालाः तस्मिन् दण्डोपनतचरितम् भेजिरे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इन्द्रादिति॥ इन्द्राद्वृष्टिरभूत्। यमो नियमिता निवारिता गदस्य रोगस्योद्रेक एव वृत्तिर्येन सोऽभूत्। यादोनाथो वरुणो नौचराणां नाविकानां कर्मणे संचाराय शिवजलपथः। सुचरजलमार्गोऽभूत्। तदनु पूर्वापेक्षी रघुरामादिमहिमाभिज्ञः कुबेरः कोषवृद्धिं विदधे। इत्थं लोकपालास्तस्मिन्राज्ञि विषये दण्डोपनतस्य शरणागतस्य चरितं वृत्तिं भेजिरे।
दुर्बलो बलवत्सेवी विरुद्धाच्छङ्कितादिभिः। वर्तेत दण्डोपनतो भर्तर्येवमवस्थितः इति कौटिल्यः ॥
Summary
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During his reign, the divine guardians of the world served King Atithi's will: Indra sent timely rains, Yama controlled diseases, Varuna ensured safe sea routes for trade, and Kubera filled his treasury. In this way, the Lokapalas acted like vassals who had been subjugated by his authority.
सारांश
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राजा अतिथि के शासन में इन्द्र ने उचित वर्षा की, यमराज ने रोगों के प्रकोप को नियंत्रित किया, वरुण ने नाविकों के लिए जलमार्गों को सुरक्षित एवं मंगलकारी बनाया और कुबेर ने राजकोष की वृद्धि की। इस प्रकार सभी लोकपालों ने राजा के प्रताप से प्रभावित होकर अनुशासित सेवकों के समान आचरण किया।
पदच्छेदः
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| इन्द्रात् | इन्द्र (५.१) | from Indra |
| वृष्टिः | वृष्टि (१.१) | rain |
| नियमितगदोद्रेकवृत्तिः | नियमित–गद–उद्रेक–वृत्ति (१.१) | whose function of outbreak of diseases was restrained |
| यमः | यम (१.१) | Yama |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| यादोनाथः | यादोनाथ (१.१) | Varuna |
| शिवजलपथः | शिव–जलपथ (१.१) | made the waterways safe |
| कर्मणे | कर्मन् (४.१) | for the work |
| नौचराणाम् | नौ–चर (६.३) | of sailors |
| पूर्वापेक्षी | पूर्व–अपेक्षिन् (१.१) | anticipating his wish |
| तदनु | तदनु | according to his wish |
| विदधे | विदधे (वि√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | effected |
| कोषवृद्धिम् | कोष–वृद्धि (२.१) | the increase of the treasury |
| कुबेरः | कुबेर (१.१) | Kubera |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | towards him |
| दण्डोपनतचरितम् | दण्ड–उपनत–चरित (२.१) | the behavior of the subdued |
| भेजिरे | भेजिरे (√भज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | adopted |
| लोकपालाः | लोकपाल (१.३) | the guardians of the world |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | न्द्रा | द्वृ | ष्टि | र्नि | य | मि | त | ग | दो | द्रे | क | वृ | त्ति | र्य | मो | ऽभू |
| द्या | दो | ना | थः | शि | व | ज | ल | प | थः | क | र्म | णे | नौ | च | रा | णाम् |
| पू | र्वा | पे | क्षी | त | द | नु | वि | द | धे | को | ष | वृ | द्धिं | कु | बे | र |
| स्त | स्मि | न्द | ण्डो | प | न | त | च | रि | तं | भे | जि | रे | लो | क | पा | लाः |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
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