अन्वयः
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मन्त्रि-वृद्धाः सङ्ग्राम-यायिनः भर्तुः पश्चिमाम् आज्ञाम् स्मरन्तः, तद्-आत्म-सम्भवम् राज्ये समादधुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तदिति॥ सङ्ग्रामयायिनः सङ्ग्रामं यास्यतः। आवश्यकार्थे णिनिः।
अकेनोर्भविष्यदाधमर्ण्ययोः (अष्टाध्यायी २.३.७० ) इति षष्ठीनिषेधः। भर्तुः स्वामिनः कुशस्य पश्चिमामन्तिमामाज्ञां विपर्यये पुत्रोऽभिषेक्तव्य इत्येवंरूपां स्मरन्तो मन्त्रिवृद्धास्तदात्मसंभवमतिथिं राज्ये समादधुर्निदधुः ॥
Summary
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The old ministers, remembering the final command of their master (Agnivarna) as he went to his final battle, installed his son (Sudarshana) in the kingdom.
सारांश
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युद्ध पर जाते समय राजा कुश की अंतिम आज्ञा का स्मरण करते हुए वृद्ध मंत्रियों ने उनके पुत्र अतिथि को राज्य का उत्तरदायित्व सौंपा।
पदच्छेदः
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| तदात्मसंभवम् | तद्–आत्म–संभव (२.१) | his own son |
| राज्ये | राज्य (७.१) | in the kingdom |
| मन्त्रिवृद्धाः | मन्त्रिन्–वृद्ध (१.३) | the old ministers |
| समादधुः | समादधुः (सम्+आ√धा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | installed |
| स्मरन्तः | स्मरत् (√स्मृ+शतृ, १.३) | remembering |
| पश्चिमाम् | पश्चिम (२.१) | final |
| आज्ञाम् | आज्ञा (२.१) | command |
| भर्तुः | भर्तृ (६.१) | of the master |
| सङ्ग्रामयायिनः | सङ्ग्राम–यायिन् (६.१) | who was going to battle |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | दा | त्म | सं | भ | वं | रा | ज्ये |
| म | न्त्रि | वृ | द्धाः | स | मा | द | धुः |
| स्म | र | न्तः | प | श्चि | मा | मा | ज्ञां |
| भ | र्तुः | स | ङ्ग्रा | म | या | यि | नः |
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