अन्वयः
AI
तयोः एकः दिवः-पतेः सिंहासन-अर्ध-भाक् आसीत्। द्वितीया अपि शच्याः सखी पारिजात-अंश-भागिनी आसीत्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तयोरिति॥ थयोः कुश-कुमुद्वत्योर्मध्य एकः कुशो दिवस्पतेरिन्द्रस्य सिंहासनार्धं सिंहासनैकदेशः, तद्भाक्। आसीत्। द्वितीया कुमुद्वत्यपि शच्या इन्द्राण्याः पारिजातांशस्य भागिनी ग्राहिणी।
संपृच्- इत्यादिना भजेर्घिनुण्प्रत्ययः। सख्यासीत्। कस्कादित्वाद्दिवस्पतिः साधुः ॥
Summary
AI
Of those two, one (Atithi) became a sharer of half of Indra's throne. The second (Kumudvati) also became a friend of Shachi and a sharer of the Parijata flowers.
सारांश
AI
उन दोनों में से कुश इंद्र के आधे सिंहासन के अधिकारी बने और कुमुद्वती इंद्राणी की सखी बनकर पारिजात पुष्पों की सह-भागिनी हुईं।
पदच्छेदः
AI
| तयोः | तद् (६.२) | Of the two of them |
| दिवस्पतेः | दिवस्–पति (६.१) | of the lord of heaven (Indra) |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| एकः | एक (१.१) | one |
| सिंहासनार्धभाक् | सिंहासन–अर्ध–भाज् (१.१) | a sharer of half the throne |
| द्वितीया | द्वितीया (१.१) | the second one |
| अपि | अपि | also |
| सखी | सखी (१.१) | a friend |
| शच्याः | शची (६.१) | of Shachi |
| पारिजातांशभागिनी | पारिजात–अंश–भागिनी (१.१) | a sharer of a portion of the Parijata flowers |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | यो | र्दि | व | स्प | ते | रा | सी |
| दे | कः | सिं | हा | स | ना | र्ध | भाक् |
| द्वि | ती | या | पि | स | खी | श | च्याः |
| पा | रि | जा | तां | श | भा | गि | नी |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.