अन्वयः
AI
इन्दोः (अंशवः) पद्मे अगतयः (भवन्ति) । सूर्यस्य अंशवः कुमुदे (अगतयः भवन्ति) । गुणिनः तस्य गुणाः तु विपक्षे अपि अन्तरम् लेभिरे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इन्दोरिति॥ इन्दोरंशवः पद्मेऽगतयः। प्रवेशरहिता इत्यर्थः। सूर्यस्यांशवः कुमुदेऽगतयः। गुणिनस्तस्य गुणास्तु विपक्षे शत्रावप्यन्तरमवकाशं लेभिरे प्रापुः ॥
Summary
AI
The moon's rays cannot open the day-blooming lotus, and the sun's rays cannot open the night-blooming lily. Unlike them, King Atithi's virtues were so pervasive that they found acceptance and made an impact even among his enemies.
सारांश
AI
जैसे चंद्रमा की किरणें कमल में और सूर्य की कुमुदिनी में प्रवेश नहीं करतीं, वैसे ही उनके श्रेष्ठ गुण शत्रुओं के खेमे में रहने वाले गुणवान व्यक्तियों के हृदयों में भी स्थान पा लेते थे।
पदच्छेदः
AI
| इन्दोः | इन्दु (६.१) | Of the moon |
| अगतयः | अगति (१.३) | have no access |
| पद्मे | पद्म (७.१) | in the lotus |
| सूर्यस्य | सूर्य (६.१) | of the sun |
| कुमुदे | कुमुद (७.१) | in the water-lily |
| अंशवः | अंशु (१.३) | the rays |
| गुणाः | गुण (१.३) | the virtues |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| विपक्षे | विपक्ष (७.१) | in the enemy's side |
| अपि | अपि | even |
| गुणिनः | गुणिन् (६.१) | of the virtuous one |
| लेभिरे | लेभिरे (√लभ् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | obtained |
| अन्तरम् | अन्तर (२.१) | an opening |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | न्दो | र | ग | त | यः | प | द्मे |
| सू | र्य | स्य | कु | मु | ऽदें | श | वः |
| गु | णा | स्त | स्य | वि | प | क्षे | ऽपि |
| गु | णि | नो | ले | भि | रे | ऽन्त | रम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.