अन्वयः
AI
कोशेन आश्रयणीयत्वम् (भवति) इति (विचार्य) तस्य अर्थ-संग्रहः (आसीत्) । हि अम्बु-गर्भः जीमूतः चातकैः अभिनन्द्यते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कोशेनेति॥ कोशेनार्थचयेन। आश्रणीयत्वं भजनीयत्वम्। भवतीति शेषः। इति हेतोस्तस्य राज्ञः कर्तुः अर्थसंग्रहः। न तु लोभादित्यर्थः। तथा हि-अम्बु गर्भे यस्य सोऽम्बुगर्भः, जीवनस्य जलस्य मूतः पुटबन्धो जीमूतो मेघः।
मूङ् बन्धने। पृषोदरादित्वात्साधुः। चातकैरभिनन्द्यते सेव्यते। न तु कर्तरि क्तः। अत्र कामन्दकः-धर्महेतोस्तथाऽर्थाय मृत्यानां रक्षणाय च। आपदर्थं च संरक्ष्यः कोशो धर्मवता सदा ॥ इति ॥
Summary
AI
His accumulation of wealth was based on the principle that a full treasury makes one a worthy refuge. Indeed, a cloud filled with water is welcomed by the Chataka birds.
सारांश
AI
दूसरों को आश्रय प्रदान करने के लिए ही उन्होंने धन का संग्रह किया। जिस प्रकार जल से भरे हुए बादलों की ही चातक पक्षियों द्वारा प्रशंसा की जाती है।
पदच्छेदः
AI
| कोशेन | कोश (३.१) | by the treasury |
| आश्रयणीयत्वम् | आश्रयणीयत्व (१.१) | the state of being a refuge |
| इति | इति | with this thought |
| तस्य | तत् (६.१) | his |
| अर्थसंग्रहः | अर्थ–संग्रह (१.१) | accumulation of wealth |
| अम्बुगर्भः | अम्बु–गर्भ (१.१) | filled with water |
| हि | हि | for |
| जीमूतः | जीमूत (१.१) | a cloud |
| चातकैः | चातक (३.३) | by the Chataka birds |
| अभिनन्द्यते | अभिनन्द्यते (अभि√नन्द् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is welcomed |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| को | शे | ना | श्र | य | णी | य | त्व | ||
| मि | ति | त | स्या | र्थ | सं | ग्र | हः | ||
| अ | म्बु | ग | र्भो | हि | जी | मू | त | ||
| श | अ | चा | त | कै | र | भि | न | न्द्य | ते |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.