अन्वयः
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द्विषाम् रोद्धुः अपि तस्य दुर्गाणि दुर्-ग्राह्याणि आसन् । हि गज-आस्कन्दी सिंहः भयात् गिरि-गुहा-शयः न (भवति) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
दुर्गाणीति॥ द्विषां रोद्धू रोधकस्यापि, न तु स्वयं रोध्यस्येत्यर्थथः। तस्य राज्ञो दुर्ग्रहाणि परैर्दुर्धर्षाणि दुर्गाणि महीदुर्गदीन्यासन्। न च निर्भीकस्य किं दुर्गैरिति वाच्यमित्यर्थान्तरन्यासमुखेनाह-न हीति॥ गजानास्कन्दति हिनस्तीति गजास्कन्दि सिंहो भयाद्धेतोः। गिरिगुहासु शेत इति गिरिगुहाशयो न हि, किंतु स्वभाव एवेति शेषः
अधिकरणे शेतेः (अष्टाध्यायी ३.२.१५ ) इत्यच्प्रत्ययः। अत्र मनुः (७।७०)-धन्वदुर्गं महीदुर्गमब्दुर्गं वार्क्षमेव वा । नृदुर्गं गिरिदुर्गं वा समाश्रित्य वसेत्पुरम् ॥ इति ॥
Summary
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His fortresses were difficult to capture even for a besieging enemy. For a lion that attacks elephants does not lie in a mountain cave out of fear.
सारांश
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शत्रुओं को रोकने वाले उस राजा के दुर्ग अभेद्य थे। हाथियों पर प्रहार करने वाला सिंह गुफा में डर से नहीं, बल्कि अपनी सामरिक रणनीति के कारण निवास करता है।
पदच्छेदः
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| दुर्गाणि | दुर्ग (१.३) | fortresses |
| दुर्ग्राहाणि | दुर्ग्राह्य (१.३) | were difficult to capture |
| आसन् | आसन् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | were |
| तस्य | तत् (६.१) | his |
| रोद्धुः | रोद्धृ (६.१) | for a besieger |
| अपि | अपि | even |
| द्विषाम् | द्विष् (६.३) | of enemies |
| न | न | not |
| हि | हि | for |
| सिंहः | सिंह (१.१) | a lion |
| गजास्कन्दी | गजास्कन्दिन् (१.१) | that attacks elephants |
| भयात् | भय (५.१) | out of fear |
| गिरिगुहाशयः | गिरि–गुहा–शय (१.१) | lies in a mountain cave |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दु | र्गा | णि | दु | र्ग्रा | हा | ण्या | सं |
| स्त | स्य | रो | द्धु | र | पि | द्वि | षाम् |
| न | हि | सिं | हो | ग | जा | स्क | न्दी |
| भ | या | द्गि | रि | गु | हा | श | यः |
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