अन्वयः
AI
यतः ते बाह्याः शत्रवः अनित्याः विप्रकृष्टाः च (भवन्ति), अतः सः पूर्वम् नित्यान् अभ्यन्तरान् षट् रिपून् अजयत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अनित्या इति॥ यतो बाह्याः शत्रवः प्रतिनृपा अनित्याः। द्विषन्ति स्निह्यन्ति चेत्यर्थः। किंच, ते बाह्या विप्रकृष्टा दूरस्थाश्च। अतः सोऽभ्यन्तरानन्तर्वर्तिनो नित्याञ्षड्रिपून्कामक्रोधादीन्। पूर्वमजयत्। अन्तःशत्रुजये बाह्या अपि न दुर्जया इति भावः ॥
Summary
AI
Because external enemies are transient and distant, he first conquered the six internal, permanent enemies (lust, anger, greed, delusion, pride, and envy).
सारांश
AI
बाहरी शत्रु अनिश्चित और दूर होते हैं, इसलिए उन्होंने सबसे पहले काम-क्रोध आदि छः आंतरिक शत्रुओं पर विजय प्राप्त की, जो सदैव निकट और घातक रहते हैं।
पदच्छेदः
AI
| अनित्याः | अनित्य (१.३) | transient |
| शत्रवः | शत्रु (१.३) | enemies |
| बाह्याः | बाह्य (१.३) | external |
| विप्रकृष्टाः | विप्रकृष्ट (१.३) | distant |
| च | च | and |
| ते | तत् (१.३) | they |
| यतः | यतः | because |
| अतः | अतः | therefore |
| सः | तत् (१.१) | he |
| अभ्यन्तरान् | अभ्यन्तर (२.३) | internal |
| नित्यान् | नित्य (२.३) | permanent |
| षट् | षष् (२.३) | six |
| पूर्वम् | पूर्वम् | first |
| अजयत् | अजयत् (√जि कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | conquered |
| रिपून् | रिपु (२.३) | enemies |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | नि | त्याः | श | त्र | वो | बा | ह्या |
| वि | प्र | कृ | ष्टा | श्च | ते | य | तः |
| अ | तः | सो | ऽभ्य | न्त | रा | न्नि | त्या |
| ञ्ष | ट्पू | र्व | म | ज | य | द्रि | पून् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.