अन्वयः
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वयः-रूप-विभूतीनाम् एक-एकम् मद-कारणम् (भवति) । तानि समस्तानि तस्मिन् (आसन्) । (तथापि) तस्य मनः न उत्सिषिचे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
वय इति॥ वयोरूपविभूतीनां यौवनसौन्दर्यैश्वर्याणां मध्य एकैकं मदकारणं मदहेतुः। तानि मदकारणानि तस्मिन्राज्ञि समस्तानि। मिलितानीति शेषः। तथापि तस्यातिथेर्मनो नोत्सिषिचे न जगर्व। सिञ्चतेः स्वरितेत्त्वादात्मनेपदम्। अत्र वयोरूपादीनां गर्वहेतुत्वान्मदस्य च मदिराकार्यत्वेनातत्कारकत्वात्
मदशब्देन गर्वो लक्ष्यत इत्याहुः। उक्तं च-ऐश्वर्यरूपतारुण्यकुलविद्याबलैरपि। इष्टलाभादिना ह्येषामवज्ञा गर्व ईरितः। मदस्त्वानन्दसंमोहः संभेदो मदिराकृतः ॥ इति॥ अत एव कविनापि उत्सिषिचे इत्युक्तम्, नतु उन्ममाद इति ॥
Summary
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Each of age, beauty, and prosperity is a cause for pride. All of these were present together in him (King Atithi). Yet, his mind did not become arrogant.
सारांश
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युवावस्था, सौंदर्य और ऐश्वर्य में से प्रत्येक मद का कारण होता है, परन्तु इन सबके एक साथ होने पर भी उनके मन में किंचित् मात्र भी अहंकार उत्पन्न नहीं हुआ।
पदच्छेदः
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| वयोरूपविभूतीनाम् | वयस्–रूप–विभूति (६.३) | of age, beauty, and prosperity |
| एकैकम् | एकैक (१.१) | each one |
| मदकारणम् | मद–कारण (१.१) | is a cause of pride |
| तानि | तत् (१.३) | those |
| तस्मिन् | तत् (७.१) | in him |
| समस्तानि | समस्त (१.३) | all together |
| न | न | not |
| तस्य | तत् (६.१) | his |
| उत्सिषिचे | उत्सिषिचे (उत्√सिच् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | became proud |
| मनः | मनस् (१.१) | mind |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | यो | रू | प | वि | भू | ती | ना |
| मे | कै | कं | म | द | का | र | णम् |
| ता | नि | त | स्मि | न्स | म | स्ता | नि |
| न | त | स्यो | त्सि | षि | चे | म | नः |
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