अन्वयः
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वशी कुशः तेन अभिजातेन जात्यः, शौर्यवता शूरः, वशिना (सह) एकम् आत्मानम् अनेकम् अमन्यत।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
जात्य इति॥ जातौ भवो जात्यः कुलीनः शूरो वशी कुशोऽभिजातेन कुलीनेन।
अभिजातः कुलीनः स्यात् इत्यमरः। शौर्यवता वशिना तेनातिथिना। करणेन एकमात्मानम्। एको न भवतीत्यनेकस्तम्। अमन्यत। सर्वगुणसामग्र्यादात्मजमात्मन एव रूपान्तरममंस्तेत्यर्थः ॥
Summary
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The self-controlled Kusha, through his association with his well-born, valorous, and self-controlled father, considered his single self to be manifold—noble, brave, and self-controlled, just like him.
सारांश
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कुलीन, शूरवीर और संयमी कुश ने अपने ही समान गुणों वाले पुत्र अतिथि को पाकर स्वयं को एक से अनेक रूप वाला अनुभव किया।
पदच्छेदः
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| जात्यः | जात्य (१.१) | noble by birth |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| अभिजातेन | अभिजात (अभि√जन्+क्त, ३.१) | by the well-born |
| शूरः | शूर (१.१) | brave |
| शौर्यवता | शौर्यवत् (३.१) | by the valorous one |
| कुशः | कुश (१.१) | Kusha |
| अमन्यत | अमन्यत (√मन् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | thought |
| एकम् | एक (२.१) | one |
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) | himself |
| अनेकम् | अनेक (२.१) | many |
| वशिना | वशिन् (३.१) | by the self-controlled one |
| वशी | वशिन् (१.१) | self-controlled |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| जा | त्य | स्ते | ना | भि | जा | ते | न |
| शू | रः | शौ | र्य | व | ता | कु | शः |
| अ | म | न्य | तै | क | मा | त्मा | न |
| म | ने | कं | व | शि | ना | व | शी |
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