अन्वयः
AI
ते अस्य मुक्तागुणोन्नद्धम् अन्तर्गतस्रजम् मौलिम् प्रभामण्डलशोभिना पद्मरागेण प्रति ऊपुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
त इति॥ ते प्रसाधका मुक्तागुणेन मौक्तिकसरेणोन्नद्धमुद्बद्धमन्तर्गतस्रजमस्यातिथेर्मौलिं धम्मिल्लं प्रभामण्डलशोभिना पद्मरागेण माणिक्येन प्रत्यूपुः प्रत्युप्त चक्रुः ॥
Summary
AI
The ministers studded his crown, which was tied with strings of pearls and had a garland placed inside, with a ruby that shone with a halo of light.
सारांश
AI
उन प्रसाधकों ने राजा के मुकुट को, जो मोतियों की मालाओं से गुंथा था और जिसके भीतर पुष्पमाला थी, कान्तिमान पद्मराग मणि से सुसज्जित किया।
पदच्छेदः
AI
| ते | तद् (१.३) | They |
| अस्य | इदम् (६.१) | of him |
| मुक्तागुणोन्नद्धम् | मुक्तागुण–उन्नद्ध (उत्√नह्+क्त, २.१) | tied with strings of pearls |
| मौलिम् | मौलि (२.१) | the crown |
| अन्तर्गतस्रजम् | अन्तर्गत–स्रज् (२.१) | which had a garland placed inside |
| प्रत्यूपुः | ऊपुः (प्रति√वप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | studded |
| पद्मरागेण | पद्मराग (३.१) | with a ruby |
| प्रभामण्डलशोभिना | प्रभामण्डल–शोभिन् (√शुभ्+णिनि, ३.१) | shining with a halo of light |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | ऽस्य | मु | क्ता | गु | णो | न्न | द्धं |
| मौ | लि | म | न्त | र्ग | त | स्र | जम् |
| प्र | त्यू | पुः | प | द्म | रा | गे | ण |
| प्र | भा | म | ण्ड | ल | शो | भि | ना |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.