अन्वयः
AI
प्रीत-मनसः ते तस्मै याम् आशिषम् उदैरयन्, सा (आशीः) तस्य कर्म-निर्वृत्तेः फलैः दूरम् पश्चात्-कृता।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
त इति॥ प्रीतमनसस्ते स्नातकास्तस्मा अतिथये यामाशिषमुदैरयन् व्याहरन् साशीस्तस्यातिथेः कर्मनिर्वृत्तैः पूर्वपुण्यनिष्पन्नैः फलैः साम्राज्यादिभिर्दूरं दूरतः पश्चात्कृता। स्वफलदानस्य तदानीमनवकाशात्कालान्तरोद्वीक्षणं न चकारेत्यर्थः ॥
Summary
AI
The blessings which they, with pleased minds, uttered for him, were far surpassed by the fruits that resulted from his own actions.
सारांश
AI
संतुष्ट विद्वानों ने राजा को जो आशीर्वाद दिए, वे राजा के कर्मों से प्राप्त होने वाले महान फलों की तुलना में बहुत पीछे छूट गए।
पदच्छेदः
AI
| ते | तद् (१.३) | They |
| प्रीतमनसः | प्रीत–मनस् (१.३) | with pleased minds |
| तस्मै | तद् (४.१) | to him |
| याम् | यद् (२.१) | which |
| आशिषम् | आशिस् (२.१) | blessing |
| उदैरयन् | उदैरयन् (उद्√ईर् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | uttered |
| सा | तद् (१.१) | that |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| कर्मनिर्वृत्तेः | कर्मन्–निर्वृत्ति (६.१) | of the accomplishment of deeds |
| दूरम् | दूरम् | far |
| पश्चात्कृता | पश्चात्कृत (पश्चात्√कृ+क्त, १.१) | left behind |
| फलैः | फल (३.३) | by the fruits |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | प्री | त | म | न | स | स्त | स्मै |
| या | मा | शि | ष | मु | दै | र | यन् |
| सा | त | स्य | क | र्म | नि | र्वृ | त्त |
| र्दू | रं | प | श्चा | त्कृ | ता | फ | लैः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.