कराभिघातोत्थितकन्दुकेय-
मालोक्य बालातिकुतूहलेन ।
ह्रदात्पतज्योतिरिवान्तरिक्षा-
दादत्त जैत्राभरणं त्वदीयम् ॥

अन्वयः AI इयम् बाला, अन्तरिक्षात् पतत् ज्योतिः इव त्वदीयम् जैत्र-आभरणम् आलोक्य, अति-कुतूहलेन (तत्) ह्रदात् आदत्त।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) करेति॥ कराभिघातेनोत्थित ऊर्ध्वं गतः कन्दुको यस्याः सा। कन्दुकार्थमूर्ध्वं पश्यन्तीत्यर्थः। इयं बाला अन्तरिक्षाज्ज्योतिर्नक्षत्रमिव। ज्योतिर्भद्योतदृष्टिषु इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२४५ ) । ह्रदात्पतत्त्वदीयं जैत्राभरणमालोक्य। अतिकुतूहलेनात्यन्तकौतुकेन। आदत्तागृह्णात् ॥
Summary AI "This young girl, seeing your victory-ornament falling into the pool like a meteor from the sky, took it out of great curiosity."
सारांश AI इस बालिका ने गेंद के समान आकाश से गिरते हुए आपके इस विजय-आभूषण को देखा और अत्यंत कौतूहलवश इसे सरोवर के भीतर से वैसे ही उठा लिया जैसे कोई गिरता हुआ तारा हो।
पदच्छेदः AI
कर-अभिघात-उत्थित-कन्दुकाकरअभिघातउत्थित (उद्√स्था+क्त)–कन्दुका (१.१) like a ball struck by the hand
इयम्इदम् (१.१) this
आलोक्य having seen
बालाबाला (१.१) girl
अतिकुतूहलेनअतिकुतूहल (३.१) with great curiosity
ह्रदात्ह्रद (५.१) from the pool
पतत्-ज्योतिःपतत् (√पतत्+शतृ)ज्योतिस् (२.१) falling light
इवइव like
अन्तरिक्षात्अन्तरिक्ष (५.१) from the sky
आदत्तआदत्त (आ√दा कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) took
जैत्राभरणम्जैत्रआभरण (२.१) the victory-ornament
त्वदीयम्त्वदीय (२.१) your
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
रा भि घा तो त्थि न्दु के
मा लो क्य बा ला ति कु तू ले
ह्र दा त्प ज्यो ति रि वा न्त रि क्षा
दा त्त जै त्रा णं त्व दी यम्
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