तस्मात्समुद्रादिव मथ्यमाना-
दुद्वृत्तनक्रात्सहसोन्ममज्ज ।
लक्ष्म्येव सार्धं सुरराजवृक्षः
कन्यां पुरस्कृत्य भुजंगराजः ॥
तस्मात्समुद्रादिव मथ्यमाना-
दुद्वृत्तनक्रात्सहसोन्ममज्ज ।
लक्ष्म्येव सार्धं सुरराजवृक्षः
कन्यां पुरस्कृत्य भुजंगराजः ॥
दुद्वृत्तनक्रात्सहसोन्ममज्ज ।
लक्ष्म्येव सार्धं सुरराजवृक्षः
कन्यां पुरस्कृत्य भुजंगराजः ॥
अन्वयः
AI
तस्मात् मथ्यमानात् उद्वृत्त-नक्रात् समुद्रात् लक्ष्म्या सार्धम् सुर-राज-वृक्षः इव, भुजंग-राजः कन्याम् पुरस्कृत्य सहसा उन्ममज्ज ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्मादिति॥ मथ्यमानात्समुद्रादिव। उद्वृत्तनक्रात्क्षुभितग्राहात्तस्माद्ध्रदात्। लक्ष्म्या सार्धं सुरराजस्येन्द्रस्य वृक्षः पारिजात इव। कन्यां पुरस्कृत्य भुजंगराजः कुमुदः सहसोन्ममज्ज ॥
Summary
AI
From that agitated pool, with its crocodiles tossed about as if from a churned ocean, the serpent king suddenly emerged. He placed a maiden before him, much like the divine Parijata tree emerged along with the goddess Lakshmi during the churning of the ocean.
सारांश
AI
मथे जाते हुए समुद्र के समान उस भंवर से वह नागराज अचानक अपनी कन्या को आगे कर बाहर निकला, जैसे कल्पवृक्ष के साथ साक्षात् लक्ष्मी प्रकट हुई हों।
पदच्छेदः
AI
| तस्मात् | तत् (५.१) | from that |
| समुद्रादिव | समुद्र (५.१)–इव | like from the ocean |
| मथ्यमानात् | being churned | |
| उद्वृत्तनक्रात् | उद्वृत्त (उद्√वृत्+क्त)–नक्र (५.१) | from which crocodiles were tossed up |
| सहसा | सहसा | suddenly |
| उन्ममज्ज | उन्ममज्ज (उद्√मज्ज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | emerged |
| लक्ष्म्येव | लक्ष्मी (३.१)–इव | like Lakshmi |
| सार्धम् | सार्धम् | with |
| सुरराजवृक्षः | सुर–राज–वृक्ष (१.१) | the Parijata tree |
| कन्याम् | कन्या (२.१) | a maiden |
| पुरस्कृत्य | placing in front | |
| भुजंगराजः | भुजंग–राज (१.१) | the king of serpents |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मा | त्स | मु | द्रा | दि | व | म | थ्य | मा | ना |
| दु | द्वृ | त्त | न | क्रा | त्स | ह | सो | न्म | म | ज्ज |
| ल | क्ष्म्ये | व | सा | र्धं | सु | र | रा | ज | वृ | क्षः |
| क | न्यां | पु | र | स्कृ | त्य | भु | जं | ग | रा | जः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.