कृतः प्रयत्नो न च देव लब्धं
मग्नं पयस्याभरणोत्तमं ते ।
नागेन लौल्यात्कुमुदेन नून-
मुपात्तमन्तर्ह्रदवासिना तत् ॥
कृतः प्रयत्नो न च देव लब्धं
मग्नं पयस्याभरणोत्तमं ते ।
नागेन लौल्यात्कुमुदेन नून-
मुपात्तमन्तर्ह्रदवासिना तत् ॥
मग्नं पयस्याभरणोत्तमं ते ।
नागेन लौल्यात्कुमुदेन नून-
मुपात्तमन्तर्ह्रदवासिना तत् ॥
अन्वयः
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देव! प्रयत्नः कृतः, च ते पयसि मग्नम् आभरण-उत्तमम् न लब्धम् । नूनम् अन्तः-ह्रद-वासिना नागेन कुमुदेन लौल्यात् तत् उपात्तम् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कृत इति॥ हे देव! प्रयत्नः कृतः। पयसि मग्नं त आभरणोत्तमं न च लब्धम्। किंतु तदाभरणमन्तर्ह्रदवासिना कुमुदाख्येन नागेन पन्नगेन लौल्याल्लोभादुपात्तं गृहीतम्।
नूनम् इति वितर्के ॥
Summary
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"O King, we made every effort, but your excellent ornament that sank in the water was not found. Surely, it has been taken out of greed by the Naga named Kumuda, who dwells deep within the river's pool."
सारांश
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गोताखोरों ने कहा कि हे देव, बहुत खोजने पर भी वह श्रेष्ठ आभूषण नहीं मिला। निश्चित ही जल के भीतर रहने वाले कुमुद नामक नाग ने उसे कौतुकवश ले लिया है।
पदच्छेदः
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| कृतः | was made | |
| प्रयत्नः | प्रयत्न (१.१) | effort |
| न | न | not |
| च | च | and |
| देव | देव (८.१) | O King! |
| लब्धम् | was found | |
| मग्नम् | sunk | |
| पयसि | पयस् (७.१) | in the water |
| आभरणोत्तमम् | आभरण–उत्तम (१.१) | the best of ornaments |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| नागेन | नाग (३.१) | by the Naga |
| लौल्यात् | लौल्य (५.१) | out of greed |
| कुमुदेन | कुमुद (३.१) | named Kumuda |
| नूनम् | नूनम् | surely |
| उपात्तम् | has been taken | |
| अन्तर्ह्रदवासिना | अन्तर्–ह्रद–वासिन् (३.१) | who dwells deep in the lake |
| तत् | तत् (१.१) | it |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | तः | प्र | य | त्नो | न | च | दे | व | ल | ब्धं |
| म | ग्नं | प | य | स्या | भ | र | णो | त्त | मं | ते |
| ना | गे | न | लौ | ल्या | त्कु | मु | दे | न | नू | न |
| मु | पा | त्त | म | न्त | र्ह्र | द | वा | सि | ना | तत् |
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