उद्बन्धकेशश्च्युतपत्रलेखो
विश्लेषिमुक्ताफलपत्रवेष्टः ।
मनोज्ञ एव प्रमदामुखाना-
मम्भोविहाराकुलितोऽपि वेषः ॥
उद्बन्धकेशश्च्युतपत्रलेखो
विश्लेषिमुक्ताफलपत्रवेष्टः ।
मनोज्ञ एव प्रमदामुखाना-
मम्भोविहाराकुलितोऽपि वेषः ॥
विश्लेषिमुक्ताफलपत्रवेष्टः ।
मनोज्ञ एव प्रमदामुखाना-
मम्भोविहाराकुलितोऽपि वेषः ॥
अन्वयः
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अम्भः-विहार-आकुलितः अपि उद्बन्ध-केशः च्युत-पत्र-लेखः विश्लेषि-मुक्ता-फल-पत्र-वेष्टः प्रमदा-मुखानाम् वेषः मनोज्ञः एव (आसीत्) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
उद्बन्धेति॥ उद्बन्धा उद्भ्रष्टाः केशा यस्मिन्सः। च्युतपत्रलेखः क्षरितपत्ररचनः। विश्लेषिणो विस्रंसिनो मुक्ताफलपत्रवेष्टा मुक्तामयताडङ्का यस्मिन्सः। एवमम्भोविहाराकुलितोऽपि प्रमदामुखानां वेषो नेपथ्यं मनोज्ञ एव। रम्याणां विकृतिरपि श्रियं तनोतीति भावः ॥
Summary
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"Even though dishevelled by the water sports, the appearance of the women's faces was still charming, with their hair tied up, painted designs washed away, and their pearl and leaf ear-ornaments loosened."
सारांश
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खुले हुए बाल, धुली हुई पत्रलेखा और ढीले पड़े कर्णफूल—जलक्रीड़ा से अस्त-व्यस्त होने के बाद भी स्त्रियों के मुखों का वह स्वाभाविक रूप अत्यंत मनोहर लग रहा है।
पदच्छेदः
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| उद्बन्ध-केशः | उद्बन्ध–केश (१.१) | with hair tied up |
| च्युत-पत्र-लेखः | च्युत–पत्र–लेखा (१.१) | from which the painted foliage designs have fallen |
| विश्लेषि-मुक्ता-फल-पत्र-वेष्टः | विश्लेषिन्–मुक्ता–फल–पत्र–वेष्ट (१.१) | with loosened pearl and leaf ear-ornaments |
| मनोज्ञः | मनोज्ञ (१.१) | charming |
| एव | एव | indeed |
| प्रमदा-मुखानाम् | प्रमदा–मुख (६.३) | of the faces of the women |
| अम्भः-विहार-आकुलितः | अम्भस्–विहार–आकुलित (१.१) | dishevelled by sporting in the water |
| अपि | अपि | even though |
| वेषः | वेष (१.१) | the appearance |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | द्ब | न्ध | के | श | श्च्यु | त | प | त्र | ले | खो |
| वि | श्ले | षि | मु | क्ता | फ | ल | प | त्र | वे | ष्टः |
| म | नो | ज्ञ | ए | व | प्र | म | दा | मु | खा | ना |
| म | म्भो | वि | हा | रा | कु | लि | तो | ऽपि | वे | षः |
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