एता गुरुश्रोणिपयोधरत्वा-
दात्मानमुद्धोढुमशक्नुवत्यः ।
गाढाङ्गदैर्बाहुभिरप्सु बालाः
क्लेशोत्तरं रागवशात्प्लवन्ते ॥
एता गुरुश्रोणिपयोधरत्वा-
दात्मानमुद्धोढुमशक्नुवत्यः ।
गाढाङ्गदैर्बाहुभिरप्सु बालाः
क्लेशोत्तरं रागवशात्प्लवन्ते ॥
दात्मानमुद्धोढुमशक्नुवत्यः ।
गाढाङ्गदैर्बाहुभिरप्सु बालाः
क्लेशोत्तरं रागवशात्प्लवन्ते ॥
अन्वयः
AI
गुरु-श्रोणि-पयोधरत्वात् आत्मानम् उद्वोढुम् अशक्नुवत्यः एताः बालाः राग-वशात् गाढ-अङ्गदैः बाहुभिः अप्सु क्लेश-उत्तरम् प्लवन्ते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
एता इति॥ गुरु दुर्वहं श्रोणिपयोधरं यस्यात्मन इति विग्रः। गुरुश्रोमिपयोधरत्वादात्मानं शरीरमुद्धोढुमशक्नुवत्य एता बाला गाढाङ्गदैः श्लिष्टाङ्गदैर्बाहुभिः क्लेशोत्तरं दुःखप्रायं यद्या तथा रागवशात् क्रीडाभिनिवेशपारतन्त्र्यात्। प्लवन्ते तरन्ति ॥
Summary
AI
"These young women, unable to support themselves due to their heavy hips and breasts, swim with great difficulty in the water with their arms adorned with tight armlets, driven only by their passion for water sports."
सारांश
AI
भारी नितम्बों और स्तनों के कारण स्वयं को संभालने में असमर्थ ये युवतियाँ, जलक्रीड़ा के प्रेमवश अपनी भुजाओं के सहारे बड़ी कठिनता से तैर रही हैं।
पदच्छेदः
AI
| एताः | एतद् (१.३) | These |
| गुरु-श्रोणि-पयोधरत्वात् | गुरु–श्रोणि–पयोधर–त्व (५.१) | due to the heaviness of their hips and breasts |
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) | themselves |
| उद्वोढुम् | उद्वोढुम् (उत्√वह्+तुमुन्) | to support |
| अशक्नुवत्यः | अशक्नुवन्ती (न√शक्+शतृ+ङीप्, १.३) | being unable |
| गाढ-अङ्गदैः | गाढ–अङ्गद (३.३) | with tight armlets |
| बाहुभिः | बाहु (३.३) | with their arms |
| अप्सु | अप् (७.३) | in the water |
| बालाः | बाला (१.३) | the young women |
| क्लेश-उत्तरम् | क्लेश–उत्तर (२.१) | with great difficulty |
| राग-वशात् | राग–वश (५.१) | out of passion/love |
| प्लवन्ते | प्लवन्ते (√प्लु कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | swim |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ता | गु | रु | श्रो | णि | प | यो | ध | र | त्वा |
| दा | त्मा | न | मु | द्धो | ढु | म | श | क्नु | व | त्यः |
| गा | ढा | ङ्ग | दै | र्बा | हु | भि | र | प्सु | बा | लाः |
| क्ले | शो | त्त | रं | रा | ग | व | शा | त्प्ल | व | न्ते |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.