परस्पराभ्युक्षणतत्पराणां
तासां नृपो मज्जनरागदर्शी ।
नौसंश्रयः पार्श्वगतां किराती-
मुपात्तबालव्यजनां बभाषे ॥

अन्वयः AI नौ-संश्रयः नृपः परस्पर-अभ्युक्षण-तत्पराणाम् तासाम् मज्जन-राग-दर्शी (सन्) पार्श्व-गताम् उपात्त-बाल-व्यजनाम् किरातीम् बभाषे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) परस्परेति॥ नौसंश्रयः परस्परमभ्युक्षणे सेचने तत्पराणामासक्तानां तासां स्त्रीणां मज्जने रागोऽभिलाषस्तद्दर्शी नृपः पार्श्वगतामुपात्तबालव्यजनां गृहीतचामरां किरातीं चामरग्राहिणीं बभाषे। किरातस्तु द्रुमान्तरे। स्त्रियां चामरवाहिन्यां मत्स्यजात्यन्तरे द्वयोः इति केशवः ॥
Summary AI The king, resting on a boat and observing the joyful bathing of his wives who were busy splashing each other, spoke to a Kirata attendant standing beside him, who was holding a chowrie fan.
सारांश AI नाव पर सवार होकर रानियों की जलक्रीड़ा देखते हुए राजा कुश ने पास खड़ी चँवर झुलाती दासी से सरयू के दृश्य के विषय में बात की।
पदच्छेदः AI
परस्पर-अभ्युक्षण-तत्पराणाम्परस्परअभ्युक्षणतत्पर (६.३) of those who were engaged in splashing each other
तासाम्तद् (६.३) of them (the women)
नृपःनृप (१.१) the king
मज्जन-राग-दर्शीमज्जनरागदर्शिन् (१.१) observing the joy of their bathing
नौ-संश्रयःनौसंश्रय (१.१) who was on a boat
पार्श्व-गताम्पार्श्वगत (२.१) who was standing beside
किरातीम्किराती (२.१) to a Kirata attendant
उपात्त-बाल-व्यजनाम्उपात्त–बालव्यजन (२.१) who held a chowrie fan
बभाषेबभाषे (√भाष् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) spoke
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
स्प रा भ्यु क्ष त्प रा णां
ता सां नृ पो ज्ज रा र्शी
नौ सं श्र यः पा र्श्व तां कि रा ती
मु पा त्त बा व्य नां भा षे
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